हम सड़क- पानी में ही उलझे रहे, उधर नेताओं व अधिकारियों ने 60113 करोड़ गायब कर दिए
Latest- Est 1 min
- 0 Views
- 4 hours ago
दतिया उपचुनाव: प्रचार थमा, त्रिकोणीय मुकाबले में कई दिग्गजों की साख लगी दांव पर
Latest- Est 1 min
- 0 Views
- 4 hours ago
बिजली कटौती से गुस्साए ग्रामीणों ने ऊर्जा मंत्री मुर्दाबाद के लगाए नारे, गांव में निकाली अर्थी
Latest- Est 1 min
- 0 Views
- 5 hours ago
Top 10 News
युवाओं के बाद अब किसान उतरा सड़कों पर, क्या भाजपा के शासनकाल में हर वर्ग परेशान..?
हम सड़क- पानी में ही उलझे रहे, उधर नेताओं व अधिकारियों ने 60113 करोड़ गायब कर दिए
दतिया उपचुनाव: प्रचार थमा, त्रिकोणीय मुकाबले में कई दिग्गजों की साख लगी दांव पर
बिजली कटौती से गुस्साए ग्रामीणों ने ऊर्जा मंत्री मुर्दाबाद के लगाए नारे, गांव में निकाली अर्थी
Business
News
Trending
Articles
Editor
Choice
युवाओं के बाद अब किसान उतरा सड़कों पर, क्या भाजपा के शासनकाल में हर वर्ग परेशान..?
Latest- Est 1 min
- 0 Views
- 3 hours ago
हम सड़क- पानी में ही उलझे रहे, उधर नेताओं व अधिकारियों ने 60113 करोड़ गायब कर दिए
Latest- Est 1 min
- 0 Views
- 4 hours ago
दतिया उपचुनाव: प्रचार थमा, त्रिकोणीय मुकाबले में कई दिग्गजों की साख लगी दांव पर
Latest- Est 1 min
- 0 Views
- 4 hours ago
बिजली कटौती से गुस्साए ग्रामीणों ने ऊर्जा मंत्री मुर्दाबाद के लगाए नारे, गांव में निकाली अर्थी
Latest- Est 1 min
- 0 Views
- 5 hours ago
Recent
Posts
युवाओं के बाद अब किसान उतरा सड़कों पर, क्या भाजपा के शासनकाल में हर वर्ग परेशान..?
60113 करोड़ के घोटाले को ढूंढ रही मोहन सरकार के सामने आया किसानो का आंदोलन
शिवपुरी से सैमुअल दास::
कुछ दिन पहले तक हजारों की संख्या में युवा दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश भर में एकजुट हुए। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होने के बाद युवाओं का आंदोलन शांत हुआ तो अब मध्यप्रदेश में किसान सड़क पर उतर आया। पहले युवा और अब किसान, तो क्या भाजपा के शासनकाल में हर वर्ग परेशान है..?। महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रदेश की मोहन सरकार अभी 5 विभागों में हुआ 60113 करोड़ रुपए का घोटाला ढूंढ नहीं पाई कि अब किसानों का आंदोलन शुरू हो गया।
ज्ञात रहे कि मध्यप्रदेश में ग्रामीण विकास के नाम पर आई राशि में से 28 हजार करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला कैग की रिपोर्ट में उजागर हुआ है। नेताओं ने ब्यूरोक्रेसी के साथ मिलकर ग्रामीणों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए विभिन्न मदों में आई राशि का ऐसा बंदरबांट किया कि अब जवाब नहीं दे पा रहे। यही वजह है कि कागजों में किसान को संपूर्ण सुख देने का दावा करने वाली सरकार की धरातल पर सच्चाई शून्य है। जिसके चलते अब अन्नदाता भी सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर आया है।
मध्यम वर्ग भी शोषण का शिकार:
देश का माध्यम वर्ग, जो सबसे अधिक है, वो भी सरकार की हिटलरशाही नीतियों से शोषित है। 1100 रुपए का गैस सिलेंडर खरीदने को मजबूर माध्यम वर्ग की बाइक को एथेनॉल वाला महंगा पेट्रोल खराब कर रहा है। महंगाई का दंश झेल रहे इस मध्यम वर्ग के सामने बच्चों को पढ़ाना एवं बीमारियों का इलाज कराना सबसे अधिक कठिन हो रहा है। सरकार के निजीकरण वाले फार्मूले ने सरकारी विभागों में भर्तियां बंद करके प्राइवेट कंपनियों को मैदान में उतार दिया। आउटसोर्स के कर्मचारी से काम करवाने के बाद भी उसे नियमित वेतन के लिए हड़ताल करनी पड़ती है। 15 हजार महीने की सेलरी पर हस्ताक्षर करवा कर 9 से 10 हजार रुपए हाथ में दिए जा रहे हैं।
शिवपुरी से युवा हुए गायब, घरों में बुजुर्ग:
शिवपुरी में रोजगार के कोई साधन न होने की वजह से शिक्षा पूरी करने वाले युवा रोजगार की तलाश में अपना शहर छोड़कर जा चुके हैं। जो युवा बाहर रहकर किसी कॉम्पटीशन की तैयारी कर रहे हैं, वो भी बाहर जॉब ढूंढकर बाहर ही रुक गए हैं। हमारे क्षेत्र के नेता उद्योग धंधे लगाने के सिर्फ दावे करते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि शिवपुरी शहर युवाविहीन हो गया, तथा घरों में बुजुर्ग ही रह गए हैं।

हम सड़क- पानी में ही उलझे रहे, उधर नेताओं व अधिकारियों ने 60113 करोड़ गायब कर दिए
पंचायत ग्रामीण विकास, सामाजिक न्याय विभाग, नगरीय प्रशासन व खाद्य आपूर्ति विभाग में खर्च किए हवा में करोड़ों रुपए
शिवपुरी से सैमुअल दास::
कैग यानि कम्प्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) जिसे हिंदी में भारत के नियंत्रक एवं महा लेखा परीक्षक कहा जाता है। कैग ने मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार में वर्ष 2024-25 के खर्चे का आंकलन किया तो 60113 करोड़ रुपए का कोई काम धरातल पर नहीं मिला। यानि विभागों के नेताओं ने अधिकारियों के साथ मिलकर हवा में ही विकास करके करोड़ों रुपए का बंदरबांट कर लिया। जिसमें सबसे अधिक पंचायत ग्रामीण विकास एवं सामाजिक न्याय विभाग में घोटाला हुआ, जबकि नगरीय प्रशासन विभाग तथा खाद्य नागरिक आपूर्ति भी पीछे नहीं रहा। सोमवार को शिवपुरी के वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद भार्गव ने चर्चा में बताया था कि देश में नेता और ब्यूरोक्रेसी का गठबंधन हो गया है, जिस वजह से भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लग पा रही।
एक नजर में किस विभाग में कितना घोटाला:
पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास में 20,453 करोड़ रुपए का घोटाला, जिसके मंत्री प्रहलाद पटेल हैं। सामाजिक न्याय विभाग एवं दिव्यांग सशक्तिकरण में 20,045 करोड़ रुपए का घोटाला, जिसकी कमान नारायण सिंह कुशवाह के पास थी। इसी क्रम में ग्रामीण विकास में 8,051 करोड़ तथा नगरीय विकास एवं आवास में 3,053 करोड़ रुपए का घोटाला, जिसके मंत्री कैलाश विजयवर्गीय है। खाद्य नागरिक आपूर्ति में भी 2181 करोड़ रुपए का घोटाला हो गया, जिसके मंत्री गोविंद सिंह राजपूत हैं।
ग्रामों के विकास के नाम पर विकसित हुए नेता:
शिवपुरी जिले में भी कई ऐसे गांव हैं, जिनमें बारिश के बाद निकलना मुश्किल हो जाता है। पिछले दिनों मालाखेड़ी गांव का बदहाल रास्ता हमने दिखाया था। ग्रामीण मोटरेबल सड़क की गुहार लगाते रह गए, जबकि ग्रामीण विकास में 20 हजार 453 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद धरातल पर काम नहीं दिखे। हजारों करोड़ की राशि अकेले नेताजी ने नहीं, बल्कि अधिकारियों के साथ मिलकर यह खेल खेला गया है।
दिव्यांजन चारपाई पर, सशक्त हो रहे नेता:
सामाजिक न्याय विभाग एवं दिव्यांग को सशक्त बनाने के लिए आई राशि में से 20,045 करोड़ रुपए खर्व करने के बाद दिव्यांग तो चारपाई पर ही रह गए, नेता व अधिकारी 20 हजार करोड़ लेकर सशक्त हो गए।
पानी की मोटर नहीं बदल पाईं, उधर करोड़ों का घोटाला कर दिया:
शिवपुरी में सिंध जलावर्धन योजना को सुचारु रूप से चलाने के लिए लगभग 4 करोड़ रुपए की लागत से नई मोटर लाना हैं। उसके लिए राशि नहीं मिल पा रही, लेकिन नगरीय प्रशासन विभाग में 3,053 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद अब उसका हिसाब नहीं दे पा रहे। शहर में विकास इसलिए नहीं हो पा रहा, क्योंकि कागजों में काम करके माल जेब में भर रहे हैं।
करोड़ों का घोटाला: चावल के ट्रक भी गायब
प्रदेश में खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम में भी 2181 करोड़ का घोटाला हो गया। नेताओं व अधिकारियों का तब भी पेट नहीं भरा तो करोड़ों रुपए का गेहूं एवं चावल के ट्रक गायब करवा दिए, जिसकी जांच चल रही है।
एक ही सवाल: कहते हैं कि दो नम्बर की कमाई फलती नहीं है, लेकिन हमारे प्रदेश के नेता तो हजारों करोड़ डकारने के बाद भी खूब फल-फूल रहे हैं। आखिर कहावत सही सिद्ध क्यों नहीं हो रही..?

दतिया उपचुनाव: प्रचार थमा, त्रिकोणीय मुकाबले में कई दिग्गजों की साख लगी दांव पर
भाजपा में दिखावा अधिक, कांग्रेस की गोपनीय तैयारी, दामोदर किसे देंगे अधिक नुकसान..?
शिवपुरी से सैमुअल दास:
दिल्ली के जंतर-मंतर में शांति होने के बाद दतिया के उपचुनाव का जब तक शोर सुनाई देता, तब तक चुनाव प्रचार ही थम गया। मंगलवार की शाम 5 बजे के बाद बाहरी लोग विधानसभा क्षेत्र से बाहर चले गए, सभाएं व रोड शो खत्म, अब घर-घर जाकर गुपचुप प्रचार शुरू। इसके बीच सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हुआ, जिसमें पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, उनके बेटे जयवर्धन सिंह व जीतू पटवारी के अलावा एक अन्य चेहरा भाजपा नेता गोपाल भार्गव जैसा दिख रहा है। यह फोटो कहां का है, असली है या नकली, इसकी पुष्टि हम नहीं करते, लेकिन इस फोटो की तरह ही दतिया उपचुनाव में भी चल रहा है।
एक नजर में दतिया उपचुनाव:
10 जुलाई की शाम जैसे ही दतिया उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी का नाम घोषित हुआ, नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने बाजार बंद व हाइवे जाम कर दिया।
अगले दिन 11 जुलाई की सुबह भोपाल से आया आदेश तो पुलिस एक्शन मोड में आई तथा मिश्रा के 27 समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज कर जाम खुलवाया।
13 जुलाई को चुनावी सभा के मंच से नरोत्तम मिश्रा ने एसपी दतिया सहित पुलिस को चैलेंज किया कि उन्होंने ठीक नहीं किया। इतना ही नहीं मिश्रा ने कोई भी बात न भूलने की बात भी कही।
इसके बाद से भाजपा नेताओं के अलावा कांग्रेस नेताओं की आवाजाही दतिया में शुरू हुई, तथा दामोदर यादव के समर्थन में भी सभाएं हुईं। इस बीच दिल्ली के जंतर-मंतर के शोर में दतिया उपचुनाव का शोर कुछ कम हो गया।
उपचुनाव से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण सवाल:
बरसों मेहनत करने के बाद नरोत्तम मिश्रा ने दतिया में अपनी पैठ बनाई थी। मिश्रा भले ही पार्टी नेताओं के दवाब में आशुतोष का साथ देने की बात कर रहे हों, क्या वो या उनके समर्थक नए नेता को जीतने का अवसर देंगे..? क्योंकि आशुतोष की जीत से मिश्रा का पॉलिटिकल कैरियर..!
कांग्रेस प्रत्याशी कु. घनश्याम सिंह को कांग्रेस के वोट बैंक के अलावा असंतुष्ट वोटरों की मदद मिल सकती है। ऐसे में कांग्रेस नेता कुछ निश्चिंत से लग रहे हैं, लेकिन मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने का दावा करने वाले दामोदर यादव जितने भी वोट ले जाएंगे, वो नुकसान कांग्रेस का ही करेंगे। अब इस मायनस मार्किंग में आशुतोष तिवारी का सितारा कितना चमक पाता है, यह तो परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा।

बिजली कटौती से गुस्साए ग्रामीणों ने ऊर्जा मंत्री मुर्दाबाद के लगाए नारे, गांव में निकाली अर्थी
दो दिन पहले सरपंच ने ग्रामीणों के साथ किया था पिछोर रोड पर चक्काजाम, प्रदर्शन के रहे पीछे
शिवपुरी। जिला मुख्यालय सहित अंचल में बिजली की घोषित के अलावा अघोषित कटौती ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। अमोला सिरसौद के ग्रामीणों ने बिजली कटौती से खफा होकर न केवल ऊर्जा मंत्री मुर्दाबाद के नारे लगाए, बल्कि अर्थी तक निकाल दी। पूरे गांव में अर्थी को घुमाने के बाद हाइवे से होते हुए मुक्तिधाम पर अंतिम संस्कार किया।
गौरतलब है कि सिरसौद गांव में हो रही बिजली कटौती से परेशान होकर सरपंच अतर सिंह लोधी ने ग्रामीणों के साथ मिलकर सिरसौद – पिछोर रोड पर चक्काजाम कर दिया था। इस दौरान सरपंच के सड़क पर लेटने के भी वीडियो वायरल हुए थे। बावजूद इसके बिजली कटौती से जब कोई राहत नहीं मिली तो बुधवार की सुबह सिरसौद के वृद्धाश्रम के सामने एक अर्थी को सजाया गया। जिसे कंधे पर लेकर ग्रामीण ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर मुर्दाबाद का नारे लगाते हुए अर्थी को लेकर पूरे गांव में घूमे। इसके बाद अर्थी को लेकर श्मशान घाट पहुंचे, जहां पेट्रोल डालकर अंतिम संस्कार किया गया।
ज्ञात रहे कि प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, शिवपुरी जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं। जिले में बिजली कटौती से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति खराब है तथा मंगलवार को सीहोर गांव सहित 11 ग्रामीणों ने भितरवार रोड पर चक्काजाम किया था।

