बारिश की बेरुखी से जिले में धान की बोबनी हुई लेट, रकवा कम हुआ, घटेगा चावल का उत्पादन

अगस्त माह में धान में फूटते थे चावल के अंकुर, इस बार खेतों में अभी लगाई धान, अगली फसल की उम्मीद भी टूटी
शिवपुरी। मानसून की बेरुखी से जहां एक तरफ ताल तलैया खाली यह गए, वहीं किसान के चेहरे पर भी चिंता की लकीरें गहरी होती जा रही हैं। अगस्त माह की 8 तारीख भी आसमान पर छाए बादलों को देखकर गुजर गई। शिवपुरी-झांसी लिंक रोड के दोनों तरफ पहले धान के खेत हुआ करते थे, लेकिन इस बार लंबे इंतजार के बाद भी बारिश पर्याप्त न होने की वजह से अगस्त के पहले सप्ताह में किसानों ने कम एरिया में धान की रोपाई की है। खेत में पानी भरने के बाद लगाए गए पौधों को पूरे समय तक पानी कैसे मिल पाएगा, इसे लेकर वो चिंतित है।
सभी का पेट भरने वाला अन्नदाता पूरी तरह से प्रकृति पर आश्रित होता है। ऐसे में जब मौसम ही बेवफाई कर जाए तो फिर किसान का परेशान होना लाजमी है। आज हमने शिवौरी-झांसी लिंक रोड पर स्थित धान के खेत मालिक कृषक विजय कुलश्रेष्ठ से बात की तो उन्होंने बताया कि हमारे खेत के पास से एक नाला निकला है, जिसमें बारिश होने पर थोड़ा पानी आ जाता है। हमने एक खेत में उसी नाले की दम पर धान की रोपाई कर दी है। विजय ने बताया कि अगस्त में तो धान में दाना फूटने लगा था, लेकिन इस बार बारिश का इंतजार करते हुए अभी बोवनी की है। जिससे फसल लेट होने की वजह से उत्पादन भी कम होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि यदि बारिश नहीं हुई तो इस फसल का उत्पादन तो घटेगा ही, अगली फसल तो बिल्कुल भी नहीं हो पाएगी।
एक ही रात में बदल गई तस्वीर:
शिवपुरी जिले की पिछोर एवं रन्नौद तहसील के बीच शुक्रवार की रात हुई झमाझम बारिश ने पूरी तस्वीर ही बदल दी। ग्राम गुरुकुवाया में हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा था, तो वहीं नावली डैम एवं महुअर नदी उफान पर आ गई। इस क्षेत्र में मूंगफली की फसल को नुकसान होने की बात भी किसान कह रहे हैं। शिवपुरी जिले में भी ऐसी ही झमाझम बारिश का इंतजार है, ताकि खाली पड़े ताल तलैया में पानी आ जाए।

