पोते की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाई दादी, तोड़ा दम, दोनों का किया अंतिम संस्कार

घटना के बाद से बदरवास के ग्राम धामनटूक में छाया मातम, 7 वर्षीय पोते की मौत बनी रहस्य
शिवपुरी। दादा-दादी एवं नाना-नानी के प्रेम के बारे में कहा जाता है कि मूल से ज्यादा ब्याज प्यारा होता है। इसका दूसरी बार शिवपुरी जिले में प्रत्यक्ष उदाहरण सामने आया। बीते शनिवार की सुबह बदरवास के ग्राम धामनटूक में रहने वाले 7 वर्षीय बालक की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई, जिसकी खबर सुनते ही उसकी दादी ने भी दम तोड़ दिया। देर शाम दादी और पोते का अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना ने हर आंख को नम कर दिया, तथा गांव में मातम पसर गया।
ग्राम धामनटूक में रहने वाले परमाल धाकड़ का इकलौता बेटा अंशुल (7) 4वीं कक्षा में पढ़ने के साथ ही नवोदय विद्यालय में एडमिशन के लिए कोलारस में रहकर पढ़ाई कर रहा था। अंशुल के साथ उसकी 55 वर्षीय दादी शांतिबाई भी रहते हुए उसका पूरा ध्यान रखती थीं। शनिवार की सुबह जब अंशुल की तबीयत बिगड़ी तो दादी ने अपने बेटे परमाल को सूचना दी। बताते हैं कि परमाल अपने बेटे अंशुल को लेकर शिवपुरी के एक प्राइवेट अस्पताल में लेकर गए, जहां कुछ देर बाद अंशुल की मौत हो गई। इकलौते बेटे की मौत के सदमें में डूबे परमाल को उनके एक मित्र ने सलाह दी कि गुना में किसी प्राइवेट डॉक्टर को दिखवा लो।
इस बीच अंशुल को बेहद प्रेम करने वाली उसकी दादी शांतिबाई को यह दुखद खबर जैसे ही मिली, तो उनकी तबियत बिगड़ने लगी। एक तरफ परिजन अपने बेटे के शव को लेकर अस्पतालों के चक्कर लगा रहे थे, इधर दादी को भी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुछ देर बाद यह खबर आई कि पोते के साथ दादी ने भी दुनिया छोड़ दी। यह खबर जिसने भी सुनी, उसके मुंह से यही निकला कि हे ईश्वर यह सब क्या हो गया। शनिवार की शाम को परमाल के घर से पोते और दादी की अर्थी एक साथ उठी, जिसे देखकर पूरे गांव में मातम छा गया। ज्ञात रहे कि लगभग 6 माह पूर्व शिवपुरी शहर में भी ऐसी ही एक घटना हुई थी, जिसमें पोते की मौत के कुछ समय बाद दादी ने भी दम तोड़ दिया था।
अंशुल की मौत के रहस्य से उठना चाहिए पर्दा:
एक 7 वर्ष का बालक शनिवार की सुबह बीमार हुआ, और प्राइवेट अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत भी हो गई। आखिर ऐसी कौन सी बीमारी थी, जिसने अंशुल की चंद घंटों में ही जान ले ली। आखिर उसका इलाज किसने किया?, डॉक्टर ने क्या ट्रीटमेंट दिया, जिससे तबीयत सुधरने की बजाए मासूम दुनिया ही छोड़ गया। इन सभी सवालों का जवाब ढूंढना भी जरूरी है, ताकि मौत का असली कारण तो सामने आ सके।


