हम सड़क- पानी में ही उलझे रहे, उधर नेताओं व अधिकारियों ने 60113 करोड़ गायब कर दिए

पंचायत ग्रामीण विकास, सामाजिक न्याय विभाग, नगरीय प्रशासन व खाद्य आपूर्ति विभाग में खर्च किए हवा में करोड़ों रुपए
शिवपुरी से सैमुअल दास::
कैग यानि कम्प्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) जिसे हिंदी में भारत के नियंत्रक एवं महा लेखा परीक्षक कहा जाता है। कैग ने मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार में वर्ष 2024-25 के खर्चे का आंकलन किया तो 60113 करोड़ रुपए का कोई काम धरातल पर नहीं मिला। यानि विभागों के नेताओं ने अधिकारियों के साथ मिलकर हवा में ही विकास करके करोड़ों रुपए का बंदरबांट कर लिया। जिसमें सबसे अधिक पंचायत ग्रामीण विकास एवं सामाजिक न्याय विभाग में घोटाला हुआ, जबकि नगरीय प्रशासन विभाग तथा खाद्य नागरिक आपूर्ति भी पीछे नहीं रहा। सोमवार को शिवपुरी के वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद भार्गव ने चर्चा में बताया था कि देश में नेता और ब्यूरोक्रेसी का गठबंधन हो गया है, जिस वजह से भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लग पा रही।
एक नजर में किस विभाग में कितना घोटाला:
पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास में 20,453 करोड़ रुपए का घोटाला, जिसके मंत्री प्रहलाद पटेल हैं। सामाजिक न्याय विभाग एवं दिव्यांग सशक्तिकरण में 20,045 करोड़ रुपए का घोटाला, जिसकी कमान नारायण सिंह कुशवाह के पास थी। इसी क्रम में ग्रामीण विकास में 8,051 करोड़ तथा नगरीय विकास एवं आवास में 3,053 करोड़ रुपए का घोटाला, जिसके मंत्री कैलाश विजयवर्गीय है। खाद्य नागरिक आपूर्ति में भी 2181 करोड़ रुपए का घोटाला हो गया, जिसके मंत्री गोविंद सिंह राजपूत हैं।
ग्रामों के विकास के नाम पर विकसित हुए नेता:
शिवपुरी जिले में भी कई ऐसे गांव हैं, जिनमें बारिश के बाद निकलना मुश्किल हो जाता है। पिछले दिनों मालाखेड़ी गांव का बदहाल रास्ता हमने दिखाया था। ग्रामीण मोटरेबल सड़क की गुहार लगाते रह गए, जबकि ग्रामीण विकास में 20 हजार 453 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद धरातल पर काम नहीं दिखे। हजारों करोड़ की राशि अकेले नेताजी ने नहीं, बल्कि अधिकारियों के साथ मिलकर यह खेल खेला गया है।
दिव्यांजन चारपाई पर, सशक्त हो रहे नेता:
सामाजिक न्याय विभाग एवं दिव्यांग को सशक्त बनाने के लिए आई राशि में से 20,045 करोड़ रुपए खर्व करने के बाद दिव्यांग तो चारपाई पर ही रह गए, नेता व अधिकारी 20 हजार करोड़ लेकर सशक्त हो गए।
पानी की मोटर नहीं बदल पाईं, उधर करोड़ों का घोटाला कर दिया:
शिवपुरी में सिंध जलावर्धन योजना को सुचारु रूप से चलाने के लिए लगभग 4 करोड़ रुपए की लागत से नई मोटर लाना हैं। उसके लिए राशि नहीं मिल पा रही, लेकिन नगरीय प्रशासन विभाग में 3,053 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद अब उसका हिसाब नहीं दे पा रहे। शहर में विकास इसलिए नहीं हो पा रहा, क्योंकि कागजों में काम करके माल जेब में भर रहे हैं।
करोड़ों का घोटाला: चावल के ट्रक भी गायब
प्रदेश में खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम में भी 2181 करोड़ का घोटाला हो गया। नेताओं व अधिकारियों का तब भी पेट नहीं भरा तो करोड़ों रुपए का गेहूं एवं चावल के ट्रक गायब करवा दिए, जिसकी जांच चल रही है।
एक ही सवाल: कहते हैं कि दो नम्बर की कमाई फलती नहीं है, लेकिन हमारे प्रदेश के नेता तो हजारों करोड़ डकारने के बाद भी खूब फल-फूल रहे हैं। आखिर कहावत सही सिद्ध क्यों नहीं हो रही..?

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