शराब विरोध के बीच जिला मुख्यालय पर कच्ची शराब का रैकेट किसके संरक्षण में चलता रहा..?

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शराब विरोध के बीच जिला मुख्यालय पर कच्ची शराब का रैकेट किसके संरक्षण में चलता रहा..?

शराब विरोध के बीच जिला मुख्यालय पर कच्ची शराब का रैकेट किसके संरक्षण में चलता रहा..?

शुक्र है जिला अभिभाषक संघ अध्यक्ष ने भेजे नोटिस, वरना शिवपुरी में भी होतीं थोकबंद मौतें

शिवपुरी। सागर के बंडा में कच्ची जहरीली शराब से हुईं थोकबंद मौतों के बाद शिवपुरी में जहां एक तरफ विरोध प्रदर्शन चल रहा था, तो वहीं दूसरी तरफ जिला मुख्यालय पर कच्ची शराब का बड़ा कारोबार संचालित हो रहा था। यह तो शुक्र है कि शिवपुरी के जिला अभिभाषक संघ के अध्यक्ष एडवोकेट विजय तिवारी ने इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस भेजे, अन्यथा शिवपुरी में भी न जाने कितने लोगों की जान चली जाती। महत्वपूर्ण बात यह है कि देहात थाना अंतर्गत फॉरेस्ट की जमीन पर हर दिन 1 लाख रुपए से अधिक की कच्ची शराब बिकती रही, तथा जिम्मेदार गांधी जी की दम पर आंख बंद करके इन्हें संरक्षण दिए हुए थे।
ज्ञात रहे कि बीते रविवार को फॉरेस्ट, आबकारी एवं पुलिस की संयुक्त टीम ने मुस्लिम कब्रिस्तान के पास स्थित फॉरेस्ट की जमीन पर पहुंचकर कुछ झोपड़े हटाए थे, इस दौरान उन्हें बड़ी मात्रा में कच्ची शराब भी मिली थी। सूत्रों की मानें तो इस पूरे खेल को पुराने शराब ठेकेदार ने इसलिए रचा था, ताकि नए ठेकेदार को नुकसान हो। इसके लिए मोहना व झांसी के कंजरों को लाकर फॉरेस्ट की जमीन में बसाकर उनसे कच्ची शराब बनवाई जा रही थी। यहां पर इतने बड़े पैमाने पर कच्ची शराब बन रही थी कि हर दिन 1 लाख रुपए से अधिक की बिक्री की जा रही थी। नशे के आदी लोगों को कच्ची शराब 50 रुपए में 200 एमएल का पाउच मिल रहा था, इसलिए इसकी खपत अधिक थी। बताते हैं कि इस खेल में वन विभाग के जिम्मेदारों के अलावा आबकारी एवं पुलिस का संरक्षण भी शामिल था, जिसके चलते कच्ची जहरीली शराब का यह कारोबार बेरोकटोक चल रहा था।

दोहरी मार कर रहा था पुराना ठेकेदार:

एडवोकेट विजय तिवारी द्वारा दिए गए नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि शिवपुरी से 5 किमी दूर सेसई व उसके आसपास पुराने ठेकेदार की शराब दुकानों पर निर्धारित रेट से कम कीमत में शराब बेचकर आबकारी नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है, जिसकी जानकारी आबकारी विभाग के अधिकारियों को भी है। यानि पुराना शराब ठेकेदार जब शिवपुरी शहर की दुकानें नहीं ले पाया तो उसने नए ठेकेदार को नुकसान पहुंचाने के लिए अपनी दुकानों से सस्ती रेट में शराब बेचने के साथ कंजरों से कच्ची शराब बनवाकर उसे दोहरी शिकस्त देने की तैयारी कर ली थी।

यदि होतीं मौत, तो कौन होता जिम्मेदार?

एडवोकेट विजय तिवारी ने बीते 10 सितंबर को एक स्टिंग वीडियो के साक्ष्य सहित नोटिस प्रमुख सचिव वाणिज्य कर विभाग, आयुक्त आबकारी विभाग, मुख्य वन संरक्षक एवं शिवपुरी एसपी को नोटिस भेजकर पूरे मामले की शिकायत की थी। जिस पर उन जिम्मेदारों को मजबूरन कार्यवाही करनी पड़ी, जो पिछले लंबे समय से नोटों की गड्डी लेकर इस खेल में संरक्षणदाता बने हुए थे। इन सबके बीच बड़ा सवाल यह है कि यदि सागर की तरह शिवपुरी में भी कच्ची शराब से थोकबंद मौत हो जातीं, तो इसका जिम्मेदार कौन होता..?

शराब विरोध के बीच जिला मुख्यालय पर कच्ची शराब का रैकेट किसके संरक्षण में चलता रहा..? शराब विरोध के बीच जिला मुख्यालय पर कच्ची शराब का रैकेट किसके संरक्षण में चलता रहा..?

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