शासकीय बजट से संवरने लगा प्राइवेट तालाब, जाधव सागर में लग रही रेलिंग में लगेंगे पौधे

नियमित साफ सफाई होकर पुलिस की रहे आवाजाही तो घूमने वालों की बढ़ेगी संख्या
शिवपुरी। एक लंबे अरसे बाद शिवपुरी शहर में कुछ अच्छा होता हुआ नजर आया। शिवपुरी शहर के जाधव सागर तालाब पर सड़क किनारे रेलिंग लगाने के साथ ही तालाब के अंदर की तरफ पिचिंग का काम भी चल रहा है। रेलिंग के बीच में क्यारी बनाकर फूल पत्तियां लगाने की भी प्लानिंग है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह तालाब छत्री ट्रस्ट का प्राइवेट तालाब है, जिसमें शासकीय धनराशि खर्च करके उसे संवारा जा रहा है।
शहर के मध्य स्थित जाधव सागर तालाब की काफी हद तक जलकुंभी साफ हो चुकी है, जबकि शहर सहित जिले के जलाशयों में छाई जलकुंभी इसी तालाब से होकर पहुंची थी। जलकुंभी साफ होने के साथ ही इसकी सड़क वाले साइड में एक चौड़ी पट्टी के रूप में पैदल घूमने का ट्रैक बनाया गया है। तालाब के किनारे पर लोहे की जाली लगाकर उसकी सीमा तय कर दी गई है, जबकि किनारें पर पिचिंग करके उसे एक व्यवस्थित तालाब बनाया जा रहा है।
तालाब में मेंटेनेंस का यह काम ठेकेदार गौरव बंसल करवा रहा है। उक्त कार्य के लिए लगभग 2 करोड़ रुपए की राशि नगरपालिका में आई थी। काम तो हालांकि स्वीकृत बजट से कम खर्चे में हो रहा है, लेकिन नगरपालिका की बंदरबांट भी तो उसी में होनी है। इसी तरह मनियर तालाब के लिए आई 5 करोड़ रुपए की भारी भरकम राशि को एक छोटी तलैया में खर्च करके उसका भी बंटवारा करके निपटा दिया। वो तलैया शिवपुरी शहर में नगरपालिका का ओपन भ्रष्टाचार है, जिस पर सभी जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं।
18 में से बचे 5 तालाब, एक और पर कब्जा:
शिवपुरी शहर को जब सिंधिया परिवार ने बसाया था, तब शहर के वाटर लेबल को बनाए रखने के लिए 18 तालाब बनाकर उन्हें नालों से आपस में जोड़ा गया था। इनमें से 13 तालाब पर भूमाफिया ने कब्जा करके उसमें कॉलोनियां काट दीं, अब जो 5 तालाब बचे हैं, उनमें से भी मनियर तालाब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। आधे से अधिक तालाब में खेती होने लगी, जबकि उसके चारों तरफ मकान बनाकर उस पर बेरोकटोक कब्जा किया जा रहा है। अफसोस की बात यह है कि शासन ने उसी मनियर तालाब को संरक्षित करने के लिए 5 करोड़ रुपए भेजे थे, जिसको एक तलैया के खर्च करके नपा के भ्रष्टाचारियों ने अपनी जेब भर लीं।




















