पहले सुरवाया की गाज में जला था आशियाना, इस बार घर में ही लड़ बैठे अपने सिपहसलार

विवादों के बीच फिर गई रोहित के हाथ से कोतवाली, वाजपेयी बने शहर कोतवाल
शिवपुरी। हमें तो अपनों ने लूटा, गैरों में कहां दम था, अपनी कश्ती वहां डूबी जहां पानी कम था। यह लाइनें कोतवाली टीआई रहे रोहित दुबे पर सटीक बैठती हैं। पिछली बार कोतवाली टीआई रहते हुए सुरवाया कांड में लाइन अटैच हो गए थे, इस बार उनके ही सिपहसलार आपस में उलझ गए। पुलिसकर्मियों के बीच विवाद के कारणों को तलाशने में लोग अपना दिमाग लगा रहे हैं, चर्चाओं में दुल्हारा गांव के बाबा का नाम भी चल रहा है।
ग़ौरतलब है कि बीते वर्ष गर्मियों में जब सुरवाया में पुलिस चेकिंग के दौरान एक बाइक सवार की बेरीकेट्स से टकराकर मौत हो गई थी। मृतक के परिजन ने जब जिला अस्पताल में हंगामा किया था, तब कोतवाली पुलिस ने थोड़ी सख्ती दिखा दी थी। जिसके परिणामस्वरूप गुस्साए लोगों ने घोड़ा चौराहे पर चक्काजाम किया था, तथा कोतवाली टीआई रोहित दुबे को लाइन अटैच कर दिया गया था।
रोहित के खासमखास रहे पूर्व एसपी अमन सिंह राठौड़ अपनी रवानगी से पूर्व उन्हें फिर से शहर कोतवाल बना गए थे। जब सब कुछ ठीक चल रहा था, तभी एक वीडियो भी चला था, जिसमें रोहित दुबे अच्छी बल्लेबाजी करते हुए नजर आए थे। उस वीडियो के यह मायने भी लगाए जा रहे थे कि बल्लेबाजी तो अब हम ही करेंगे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। बुराई पर अच्छाई की जीत वाले दशहरा पर्व पर शरद व विनय के बीच हुए विवाद ने रोहित दुबे की कोतवाली से विदाई करवा दी।
विवाद के पीछे बाबा का नाम भी चर्चा में:
कोतवाली में पदस्थ शरद एवं विनय के बीच हुए विवाद के पीछे कारणों की तलाश में ग्राम दुल्हारा (बैराड़) के बल्लू गोस्वामी उर्फ बाबा का नाम भी एकाएक चर्चा में आ गया, जिसे पिछले दिनों कोतवाली पुलिस ने बड़ी मात्रा में गांजे के साथ दबोचा था। बताते हैं कि बाबा का जुड़ाव केवल नशे से ही न होकर आईपीएल से भी है, तथा वो एक बड़ी राशि मैनेज करने में खर्च करता है। शायद यही वजह है कि विवाद हुआ दो पुलिसकर्मियों में, लेकिन गाज गिरी 9 लोगों पर, जिसमें टीआई रोहित दुबे लाइन अटैच कर दिए गए, तथा 8 पुलिसकर्मी सस्पेंड हुए। अब कोतवाली की कमान पुनीत बाजपेयी संभालेंगे।




















