नुकसान: बेमौसम बारिश में उफना नाला, किसान की पानी में बह गई 70 क्विंटल मक्का

एक साल पूर्व जंगल की जिस जमीन को कराया कब्जामुक्त, उस पर कब्जा कर खेती की तैयारी
शिवपुरी। बेमौसम बारिश कुछ ऐसी हुई कि एक किसान को बड़ा नुकसान दे गई। झमाझम हुई बारिश में उसकी 70 क्विंटल मक्का की फसल नाले में बह गई। उधर कोलारस विधानसभा क्षेत्र में जंगल की जिस जमीन को फॉरेस्ट ने एक साल पूर्व कब्जामुक्त कराया था, उस पर फिर से खेती की तैयारी कर ली गई। जिसे अब पुनः हटाने की बात अधिकारी के रहे हैं।
दीवाली से पहले किसान का निकाला दीवाला:
कोलारस विधानसभा के ग्राम सुमेला में रहने वाले रंजीत यादव के खेतों ने इस बार मक्का का अच्छा उत्पादन दिया था। रंजीत की 140 क्विंटल मक्का रविवार को घर के बाहर सूख रही थी। शाम 5 बजे एकाएक मौसम बदला तथा तेज बारिश शुरू हो गई। देखते ही देखते रंजीत की सूख रही मक्का की फसल न केवल गीली हो गई, बल्कि पानी के साथ बहने लगी। चूंकि बारिश बहुत तेज थी, इसलिए उनके घर के पास का नाला भी उफन आया तथा आंगन में सूख रही लगभग आधी मक्का (70 क्विंटल) पानी के साथ नाले में बह गई। बारिश रुकने के बाद किसान ने नाले में उतरकर अपनी मेहनत की फसल को समेटने का प्रयास किया, लेकिन उसकी अधिकांश मक्का नाले में पानी के तेज भाव के साथ बहुत दूर तक पहुंच चुकी थी। बताते हैं कि इस बार रंजीत की फसल अच्छी होने पर उसे लगा था था कि दीवाली अच्छी मनेगी, लेकिन प्रकृति के प्रकोप ने उसका दीवाला निकाल दिया।
वन विभाग की सांठगांठ से फिर हुआ कब्जा:
शिवपुरी जिले की कोलारस विधानसभा अंतर्गत सजवाया गांव के पास फॉरेस्ट की सेसई बीट के हाथीगड़ा नाले के पास 40 बीघा वन भूमि से एक साल पूर्व वन विभाग की टीम ने कब्जामुक्त कराया था। फॉरेस्ट की टीम ने जमीन खाली करवाने के बाद उसे यूं ही खाली छोड़ दिया था। अब उक्त फॉरेस्ट की जमीन की जुताई करके फिर से खेती की तैयारी शुरू हो गई। सूत्रों का कहना है कि वन भूमि के इस कब्जे में फॉरेस्ट के स्थानीय लोगों की भी सांठगांठ है। अब जब यह मामला उजागर हुआ तो डीएफओ सुधांशु यादव ने कब्जा जल्द हटवाने तथा उक्त जमीन पर प्लांटेशन कराने की बात कही है।




















