लखनऊ उप्र के निर्दोष आरक्षक को राजस्थान की पुलिस ने 166 दिन तक जेल में भिजवाय

लखनऊ उप्र के निर्दोष आरक्षक को राजस्थान की पुलिस ने 166 दिन तक जेल में भिजवा
सवाई माधौपुर राजस्थान की पुलिस के साथ न्यायालय ने भी सिपाही को जबरन दोषी बनाया
शिवपुरी से सैमुअल दास:
देश के गृह मंत्री संसद नहीं जा रहे, तथा पुलिस इतनी अंधी-बहरी हो गई कि लखनऊ उप्र के एक निर्दोष पुलिस आरक्षक को राजस्थान के सवाई माधोपुर की जेल में 166 दिन जेल में रहना पड़ा। राजस्थान की पुलिस उक्त आरक्षक को उस समय बदमाशों की तरह प्राइवेट कपड़ों में उठाकर लाई थी, जब वो 15 फरवरी को परिवार के साथ मंदिर में पूजा करके बाहर निकल रहे थे।
ऐसे समझें पूरा मामला:
लखनऊ उप्र में विशेष पुलिस शाखा में पदस्थ कमलेश त्रिपाठी को राजस्थान की सवाई माधौपुर पुलिस ने बीते 15 फरवरी को बिना नंबर की कार में प्राइवेट कपड़ों में बदमाशों की तरह सरेराह उठा लिया। लखनऊ से राजस्थान तक के बीच रास्ते में कमलेश खुद को पुलिस आरक्षक बताने की हर संभव कोशिश करते रहे। राजस्थान पुलिस के अलावा न्यायालय भी कमलेश त्रिपाठी को निर्दोष मानने को तैयार नहीं था, इसलिए उनकी जमानत अर्जी निरस्त करके 166 दिन तक अपराधियों के साथ जेल में बंद रखा।
बरसों पहले मर चुके ठग के फेर में उठाया:
गोमतीनगर लखनऊ में रहने वाले आरक्षक कमलेश त्रिपाठी को राजस्थान पुलिस ने अलीगंज लखनऊ में रहने वाले शातिर ठग कमलेश त्रिपाठी समझकर उठाया था। ठग ने वर्ष 1994 में एक कंपनी बनाकर कई लोगों के साथ ठगी की थी, जिसमें वो फरार रहते हुए बेसों पहले दुनिया भी छोड़ चुका था। ठग की मौत से अनभिज्ञ राजस्थान पुलिस उसकी जगह पुलिस आरक्षक कमलेश त्रिपाठी को उठा ले गई।
उम्र के अंतर से हुई असली-नकली की पहचान:
आरक्षक कमलेश की पत्नी आराधना ने बताया कि वर्ष 1994 में जब फर्जी कंपनी ने ठगी की थी, तब उनके पति हाईस्कूल में पढ़ रहे थे। ठग कमलेश एवं सिपाही कमलेश की उम्र में भी बड़ा अंतर था, जिसे अराधना ने न्यायालय में प्रमाणित किया, तब आरक्षक को जेल से रिहाई मिली।
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