हाईकोर्ट में पार्क प्रबंधन के दावे को प्रमाणित करता कर्बला से चांदपाठा को जोड़ता यह नजारा

हाईकोर्ट में पार्क प्रबंधन के दावे को प्रमाणित करता कर्बला से चांदपाठा को जोड़ता यह नजारा
शिवपुरी शहर के नालों से आने वाली स्वरयुक्त गंदगी पहुंच रही रामसर साइट में शामिल चांदपाठा में, कैसे होगी झील संरक्षित..?
शिवपुरी। हाईकोट ग्वालियर में शिवपुरी के दो मामले चल रहे हैं, जिसमें एक सीवर प्रोजेक्ट का तथा दूसरा चांदपाठा में छाई जलकुंभी का। जिसमें माधव टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने न्यायालय में यह कहा है कि जब तक शहर के नालों से आने वाली सीवर की गंदगी को नहीं रोका जाएगा, तब तक जलकुंभी को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। प्रबंधन का यह दावा सच है, जो वर्तमान में कर्बला पुल से खड़े होकर देखने से नजर आ जाएगा।
ज्ञात रहे कि शिवपुरी की चांदपाठा झील जिसे सांख्य सागर भी कहते हैं, को संरक्षित करके सुंदर बनाए जाने के लिए सीवर प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ था। जिसका उद्देश्य यह था कि शहर की विभिन्न नाली एवं नालों के माध्यम से आने वाली सीवर की गंदगी को सीवर प्रोजेक्ट के चैंबरों से जोड़ दिया जाएगा, तो फिर झील में गंदगी नहीं जाएगी। यह उद्देश्य कितना पूरा हुआ, यह तो हमारा पूरा शहर जानता है। सीवर प्रोजेक्ट को न्यायालय ने फैल मान लिया, तथा शहर के नालों की गंदगी अभी भी कर्बला से होती हुई चांदपाठा झील में पहुंच रही है।
पार्क प्रबंधन पर मशीन, फिर भी झाडा पल्ला:
चांदपाठा झील में छाई जलकुंभी को साफ करने के लिए पौने 2 करोड़ रुपए की मशीन क्षेत्रीय सांसद ने सरकार के माध्यम से न केवल उपलब्ध करवाई थी, बल्कि खुद भी सफाई करके बताया था। पार्क प्रबंधन ने उस मशीन को भी झील में कम और कागजों में अधिक चलाया। चूंकि झील में से जलकुंभी साफ नहीं कर पाए तो यह कारण बताकर पल्ला झाड़ लिया कि सीवर की गंदगी रुकवाओ, तब जलकुंभी साफ होगी। पार्क प्रबंधन भी जानता है कि जब सीवर प्रोजेक्ट ही फैल हो गया तो यह गंदगी रुक नहीं पाएगी।
झील में गंदगी के साथ गहराई हो रही कम:
शिवपुरी शहर के नालों में जमा गंदगी पानी के तेज फ्लो के साथ कर्बला से होते हुए चांदपाठा झील में पहुंचती है। सीवर सहित अन्य जैविक कचरा एक तरफ झील के पानी को प्रदूषित कर रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ गंदगी झील की तलहटी में जमा होते रहने से उसकी गहराई भी तेजी से घट रही है। यही वजह है कि यह झील जल्दी भर भी जाती है, और गर्मी शुरू होने के साथ ही सूखने भी लगती है।




















