हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनी बनी कमर्शियल बाजार, घर की दीवारें तोड़कर बनाईं दुकानें

अतिक्रमण के नाम पर जिनकी हटाई दुकानें, वो ही 18 से 20 हजार रुपए महीना किराया दे रहे
शिवपुरी। मेडिकल कॉलेज के पास स्थित हाउसिंग बोर्ड कालोनी अब कमर्शियल बाजार बन गई। जिन घरों को रहने के लिए बनाया, उनकी दीवारों को तोड़कर दुकानें बना दी गईं। महत्वपूर्ण बात यह है कि एक कमरे की दुकान भी 18 से 20 हजार रुपए महीना किराए पर उठा दी गई।
शिवपुरी मेडिकल कॉलेज के मुख्य द्वार के आसपास एवं सामने की तरफ लगभग आधा सैकड़ा छोटी- बड़ी दुकानों को अतिक्रमण मानकर प्रशासन ने हटाया था। चूंकि मेडिकल कॉलेज में सैकड़ों की संख्या में स्टाफ एवं बड़ी संख्या में आने वाले मरीज व उनके अटेंडरों के लिए खाने-पीने की चीजों के लिए अलावा अन्य सामग्री भी उन दुकानों पर बिका करती थी। प्रशासन ने उन सभी दुकानों को अतिक्रमण मानते हुए हटा दिया था, जिसके चलते मरीज व उनके अटेंडर चाय तक को तरस गए थे।
फिर हाउसिंग बोर्ड कालोनी बनी बाजार:
चूंकि मेडिकल कॉलेज का स्टाफ एवं मरीज और उनके अटेंडरों की आवाजाही से मेडिकल कॉलेज का बाजार अच्छा चलता था। जिनकी दुकानें तोड़कर हटाई गईं, उन्होंने हाउसिंग बोर्ड कालोनी के लोगों से बात करके उनके घरों को दुकान बनवा लिया। मेडिकल कॉलेज की तरफ सड़क किनारे वाले घरों की दीवारें तोड़कर उन कमरों को दुकान बना दिया। चूंकि दुकानदारों की रोजी रोटी का सवाल था, तो उन्होंने यह दुकानें 18 से 20 हजार रुपए महीना किराए पर लेकर अपना कारोबार शुरू कर दिया।
कॉलेज गेट के पास फिर शुरू हुआ अतिक्रमण:
शिवपुरी मेडिकल कॉलेज के सामने दीवार के किनारे से फिर स्टॉल आदि रखकर अतिक्रमण करना शुरू कर दिया। अभी लगभग आधा दर्जन से अधिक दुकानें जमाई जा चुकी हैं। प्रशासन के जिम्मेदार यदि शुरुआत के दौरान ही रोक दिया जाए तो फिर बड़ी कार्यवाही की जरूरत नहीं पड़ेगी। उधर हाउसिंग बोर्ड कालोनी में महंगे किराए पर खोली गई दुकानों में घरेलू बिजली कनेक्शन एवं नगरपालिका में रहवासी टेक्स दिया जा रहा है। जबकि अब यह कॉलोनी बाजार का रूप धारण कर चुकी है।




















