शिवपुरी में इंसानों से पहले टाइगरों का ही था साम्राज्य, जंगल में अब फिर बढ़ने लगी आबादी

शिवपुरी में इंसानों से पहले टाइगरों का ही था साम्राज्य, जंगल में अब फिर बढ़ने लगी आबादी
SD न्यूज ने पहले ही बताया था: पर्यटकों को नजर आ सकते हैं टाइगरों के नए मेहमान
शिवपुरी। माधव टाइगर रिजर्व में पर्यटकों के लिए खुशखबरी के रूप में टाइगर के दो शावक कैमरों में कैद हो गए। अक्टूबर में जब सैलानियों लिए इसे खोला जा रहा था, उस दौरान SD न्यूज ने यह बताया था कि सैलानियों को जंगल में नए मेहमान नजर आ सकते हैं। टाइगरों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ही शिवपुरी-झांसी लिंक रोड को बंद करने की तैयारी की जा रही है, क्योंकि टाइगरों का मूवमेंट इसी रोड से क्रॉसिंग करके होता है।
ज्ञात रहे कि सिंधिया परिवार ने जब शिवपुरी को बसाया था, उससे पहले यहां के बियाबान जंगल में टाइगरों का साम्राज्य था। माधव नेशनल पार्क बनने के बाद टाइगरों को एक पिंजरे में कैद करने के बाद उन्हें भी बाहर भेज दिया था। उसके बाद बरसों तक यह जंगल टाइगर विहीन रहा तथा 3 साल पूर्व जब पुनः उन्हें बसाया गया तो कुछ समय इंतजार के बाद अब उनकी आबादी फिर से बढ़ना शुरू हो गई है। वर्तमान में 11 टाइगर मौजूद हैं। जिस तरह से श्योपुर में चीतों की आबादी तेजी से बढ़ रही है, वैसी ही रफ्तार यदि टाइगरों ने पकड़ी तो फिर रिहायशी इलाकों में टाइगरों की आवाजाही बढ़ जाएगी।
शिवपुरी में टाइगरों के सम्राज्य के कई प्रमाण:
प्राचीन पर्यटन स्थल भूरा खो के गेट पर एक पुराना पत्थर लगा था, जिस पर जॉर्ज पंचम द्वारा किए गए टाइगर के शिकार की इबारत लिखी हुई थी। माधव टाइगर रिजर्व में मौजूद जॉर्ज कैसल को भी इसलिए बनाया गया था ताकि टाइगर का शिकार करने आने वाले जॉर्ज पंचम वहां रुक सकें। जंगल में बने शिकारगाह भी इस बात के प्रमाण हैं कि टाइगरों का शिकार यहां पर किया जाता था। आजादी से पहले अंग्रेजी हुकूमत के राजा एवं अधिकारी शिवपुरी में टाइगर का शिकार करने के लिए आते थे।




















