गुना न्यायालय में पदस्थ स्टेनो शिवपुरी निवासी मनीष ने की आत्महत्या, छोड़ा सुसाइड नोट

महिला मजिस्ट्रेट की प्रताड़ना से तंग आकर जान देने की लिखी बात, पत्नी से मांगी माफी
चार भाइयों में सबसे बड़ा था मनीष, परिवार को संभालने वाला ही छोड़ गया अब दुनिया
शिवपुरी से सैमुअल दास::
गुना न्यायालय में स्टेनो के पद पर कार्यरत शिवपुरी निवासी मनीष बाथम ने बीते 6 अक्टूबर को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसका शव गुना से 80 किमी दूर विदिशा रोड पर लटेरी गांव के पास नदी किनारे पेड़ से लटका मिला। मृतक के पास एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उसने महिला मजिस्ट्रेट की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या करने की बात लिखी है। मनीष ने अपनी पत्नी विनीता से माफी भी मांगी है।
शिवपुरी की इंदिरा कॉलोनी में रहने वाले मनीष बाथम के पिता की मौत लगभग 10 वर्ष पूर्व हो गई थी। लगभग 8 वर्ष पूर्व मनीष की नौकरी न्यायालय में स्टेनो के पद पर लगने के बाद उसने अपने परिवार को मुखिया की तरह संभाला था। गुना न्यायालय में पदस्थ मनीष बाथम व्यवहार में बहुत ही सीधा व सरल था। मनीष के साथ गुना रहने वाले उसके छोटे भाई अमित बाथम ने बताया कि घटना से 5 दिन पूर्व चलती कोर्ट में मनीष को चक्कर आने के बाद वो बेहोश हो गया था। उसके बाद से मनीष को कोर्ट छोड़ने के लिए अमित ही बाइक से जाता था।
अमित ने बताया कि बीते 6 अक्टूबर को सुबह 9 बजे वो मनीष को गुना कोर्ट छोड़कर आया था। दोपहर लगभग 12 बजे मनीष ने अमित को फोन लगाकर बुलाया तथा बाइक से खुद बाहर जाने की बात कही। अमित ने कहा कि मैं साथ में चलता हूं तो मनीष ने कहा कि मुझे मैडम काम से भेज रही हैं, इसलिए मैं अकेला ही जाऊंगा। दो घंटे बाद अमित को कोर्ट के कर्मचारियों ने बताया कि तुम्हारा भाई कहीं गायब हो गया है, उसके बाद से वो सभी उसकी तलाश में सीसीटीवी कैमरे देख रहे थे। 7 अक्टूबर को लटेरी में।लाश मिलने की सूचना मिली।
सुसाइड नोट: मर जाने की बात कहती थी मैडम
अमित के मोबाइल में अपने भाई के सुसाइड नोट का फोटो है। जिसमें मनीष ने लिखा है कि महिला मजिस्ट्रेट प्रिया उसे प्रताड़ित करते हुए कहती थीं कि तू मर जा, नहीं तो मैं तेरी नौकरी खा जाऊंगी। बताते हैं कि कोर्ट की कोई फाइल गुम हो गई थी, जिसके लिए महिला मजिस्ट्रेट उसे प्रताड़ित कर रही थीं। बताते हैं कि इस संबंध में मनीष ने वरिष्ठ न्यायाधीश ने भी शिकायत की थी, जिसके बाद मैडम ने उसकी और भी तगड़ी क्लास ली थी। चूंकि मनीष व्यावहारिक एवं बहुत सीधा था, इसलिए उसके पक्ष में कर्मचारी संगठन भी एकजुट हो रहे हैं।




















