पहले कोकरोच बताया, अब मक्खी की संज्ञा दे दी सीजेआई ने: देश की राजधानी में फिर उफान

पुलिस की भी हो रही फिजिकल ट्रेनिंग, युवाओं के साथ राजनीतिक दल भी तलाश रहे भविष्य
शिवपुरी से सैमुअल दास:
सीजेआई सूर्यकांत ने पहले युवाओं को कॉकरोच बताया तो उन्होंने एकजुट होकर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले लिया। अब सीजेआई ने उन्हें मक्खी की संज्ञा देते हुए कहा कि हथौड़ा मारने की जरूरत नहीं है। वो तो सुरक्षित कमरे में बैठकर कुछ भी बोल देते हैं, लेकिन उसके साइड इफेक्ट तो आमजन के साथ पुलिस भुगतती है। दिल्ली पुलिस का शनिवार को जमकर फिजिकल ट्रेनिंग हुई, तथा देश की राजधानी में जमकर बवाल कटा। महत्वपूर्ण बात यह है कि युवाओं के साथ अन्य राजनैतिक दल भी अपना भविष्य इस हंगामे के बीच तलाशते नजर आ रहे हैं।
आखिर दिल्ली में फिर क्यों बने ऐसे हालात?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एक दल विशेष को हर चुनाव जिताने के लिए वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर जो खेल खेला, उसका राजफाश इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर ने कर दिया। तब देश की जनता को पता चला कि जिस सरकार के निर्णयों से हर वर्ग परेशान है, वो आखिर किस तरह वोट चोरी करके हर चुनाव जीत रही है। उसके बाद ज्ञानेश कुमार गायब हो गए तथा उनके पक्ष में भाजपा नेताओं ने देश भर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके राहुल गांधी को कोसना शुरू के दिया। चुनाव जीतने के लिए रचे गए षड्यंत्र का खुलासा होने के बाद देश की जनता हतप्रभ होकर फिर से कॉकरोच यानि युवाओं की तरफ आशा भरी नजरों से देखने लगी। इस बार युवाओं के साथ अन्य दलों के नेता भी जुड़ गए तथा दिल्ली में बबाल हो गया।
पुलिस व युवाओं के बीच खींचतान:
दिल्ली के जंतर मंतर पर भीड़ इकट्ठी न हो जाए, इसके लिए ट्रेनों के अलावा यात्री वाहनों की चेकिंग शुरू कर दी गई। बावजूद इसके दिन भर युवाओं व पुलिस के बीच जमकर झूमा झटकी होती रही। जिसके बीच आमजन परेशान हुआ, क्योंकि दिल्ली मरीजों का इलाज करने वाला एक बड़ा केंद्र है। इस दौरान दिल्ली के पुलिसकर्मी भी यह जरूर सोचते होंगे कि बंद कमरों में बैठने वालों की करनी का परिणाम हमें भुगतना पड़ता है, क्योंकि भीड़ की कोई शक्ल नहीं होती।
गोदी मीडिया अपने काम पर लगा रहा:
एक तरफ सोशल मीडिया पर दिल्ली में हो रहे बबाल के वीडियो चल रहे थे, लेकिन इस दौरान गोदी मीडिया अपनी ड्यूटी बखूबी निभाता नजर आया। एक चैनल ने तो इस पूरे प्रोटेस्ट को असफल ही घोषित कर दिया।
पहले धर्मेंद्र, अब ज्ञानेश को बचाने की कवायद:
पिछली बार जब कॉकरोच दिल्ली में एकजुट हुए थे, तब निशाने पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा था। हालांकि बाद में प्रधान को इस्तीफा देना ही पड़ा था। अब भीड़ के निशाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं, देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार भी भीड़ की मांग पूरी होगी या फिर केंद्र सरकार उन्हें बचाने में सफल होगी..??





















