बिना ड्राई डे के ग्रामीण क्षेत्रों की अधिकांश शराब दुकानें बंद, ठेकेदार मांग रहे प्रशासन की मदद

नारी शक्ति ने दिखाया रौद्र रूप, आबकारी के साथ पुलिस भी आई लपेटे में, विरोध चरम पर
शिवपुरी। पहले ड्राई डे को ही शराब की दुकानें बंद हुआ करती थीं, लकिन अब शिवपुरी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की अधिकांश दुकानें बंद हो गईं। शराब की दुकानों में हो रही तोड़फोड़ व लठियाई से घबराए शराब ठेकेदारों ने गुरुवार को आबकारी विभाग में आवेदन देकर सुरक्षा की मांग की है, अन्यथा अपने लाइसेंस सरेंडर करने की बात भी वो कर रहे हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि आज अमोलपठा में आबकारी के अलावा पुलिस वालो के साथ भी लठियाई कर दी गई।
मध्यप्रदेश के सागर के बंडा में जहरीली शराब से हुई मौतों का साइड इफेक्ट सबसे अधिक शिवपुरी में देखने को मिला। पिछले 3 दिन से हर रोज किसी न किसी शराब की दुकान में महिलाओं की टीम लाठियां लेकर पहुंच रही है, तथा शराब की पेटियों को बाहर पटक कर उन्हें लाठियों से तोड़ा जा रहा है। इसकी शुरुआत नया अमोला से हुई, जो अब अमोलपठा, मनपुरा से होते हुए पिछोर तक पहुंच गई है। अब स्थिति यह है कि शराब ठेकेदार के कर्मचारी दुकान पर बैठने से कतरा रहे हैं, क्योंकि लाठियों से लैस नारी शक्ति बिना कोई बातचीत किए, सीधे ही एक्शन मोड में आ जाती है। एक तरफ जहां शराब का विरोध करने वाली महिलाएं पेटियां तोड़ने का काम कर रही हैं, वहीं उनके साथ कुछ शराबी इस जुगाड़ में रहते हैं कि जितनी ज्यादा से ज्यादा बोतलें सुरक्षित निकाल कर ले जा सकें, क्योंकि इस दौरान शराब ठेकेदार के लोग आसपास नजर भी नहीं आते।
गुरुवार को अमोलपठा में पुलिस एवं आबकारी के कर्मचारियों ने लाठियों से लैस महिलाओं को काफी देर तक समझाने का प्रयास किया। समझाइश के दौरान ही महिलाएं इतनी आक्रोशित हो गईं कि उन्होंने शराब की दुकान में तो तोड़फोड़ की ही, साथ ही पुलिस एवं आबकारी टीम पर भी हमला के दिया। हालात यह बने कि पुलिसकर्मियों ने भागकर किसी तरह खुद को बचाया।
शराब ठेकेदारों ने सौंपा ज्ञापन:
लगभग हर रोज हो रहीं इन घटनाओं से घबराए शराब ठेकेदारों ने करेरा एवं पिछोर क्षेत्र में शराब की दुकानों को बंद कर दिया। साथ ही आज दोपहर 2 बजे जिला आबकारी अधिकारी को ज्ञापन देकर सुरक्षा की मांग की। ठेकेदारों का कहना है कि सागर की घटना के बाद मध्यप्रदेश का एकमात्र शिवपुरी ही ऐसा जिला है, जहां इस तरह के हालात बन गए हैं। उनका कहना है कि यदि आबकारी विभाग एवं पुलिस प्रशासन हमें सुरक्षा नहीं दे पाया, तो फिर हम लाइसेंस सरेंडर कर देंगे। ज्ञात रहे कि शिवपुरी जिले में आबकारी विभाग के माध्यम से शासन को 500 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होता है।



















