जब प्रशासनिक अधिकारी बने कार्यकर्ता तो जिले के हालात बिगड़ना ही थे, पुलिस आई एक्शन मोड में

0

जब प्रशासनिक अधिकारी बने कार्यकर्ता तो जिले के हालात बिगड़ना ही थे, पुलिस आई एक्शन मोड में

अमोलपठा में हुए पुलिस पर हमले के आरोपियों को चिन्हित कर गिरफ्तारी शुरू, साजिशकर्ता भी हों बेनकाब

शिवपुरी। पिछले 4 दिनों में शिवपुरी जिले में जो कुछ घटित हुआ, उसने प्रशासनिक लचरता को उजागर करते हुए जिले के हालात अराजक बना दिए। शराब की अवैध दुकानों के अलावा लाइसेंस वाली दुकानों पर तोड़फोड़ एवं लूटपाट करने वाली भीड़ अपने आकाओं के इशारे पर इतनी मनमानी पर उतारू हो गई कि उसने खाकी पर भी लाठियां बरसाने से परहेज नहीं किया। पुलिस की हुई मारपीट के वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुए तो फिर पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया ने सख्त कदम उठाते हुए वायरल वीडियो की मदद से हमलावर आरोपी चिन्हित करवा कर उनकी गिरफ्तारी शुरू करवाई।
गौरतलब है कि बीते मंगलवार को प्रशासन के मुखिया का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वो जनता को छोड़ नेताजी के साथ एक कार्यकर्ता की तरह उठकर चल दिए, उसके बाद पुलिस वालों को दौड़ाकर पीटने के वीडियो ने शिवपुरी जिले की प्रशासनिक एवं पुलिस व्यवस्था की कलई प्रदेश सहित देश भर में खोलकर रख दी। स्थिति कुछ ऐसी बनी कि महिलाओं की टोलियां हर रोज सुबह लाठियां लेकर शराब की दुकानों की ओर रुख कर रहीं थीं। उनके साथ कुछ शराब लुटेरे भी सक्रिय हो गए, जो तोड़फोड़ के दौरान शराब की पेटियां अपने ठिकानों पर पहुंचा रहे थे। यह सब कुछ जिस तरह से चल रहा था, उसे देखकर लगता है कि यह भीड़ किसी के इशारे पर जिले में अराजकता फैलाने का काम कर रही है। अब जबकि पुलिस एक्शन मोड में आ गई है, तो तोड़फोड़ व पुलिस की मारपीट करने वालों के अलावा उन साजिशकर्ताओं को भी चिन्हित किया जाए, जो इस तरह की घटनाओं को करवा कर शराब ठेकेदारों से मोटी रकम वसूलने की तैयारी कर रहे थे।

आबकारी विभाग की सांठगांठ से बिगड़े हालात:

पोहरी से कांग्रेस विधायक कैलाश कुशवाह ने विधानसभा में यह आरोप लगाया था कि शिवपुरी के हर गांव में दो-दो अवैध दुकानें खुलवाकर शराब कमीशन पर बिकवाई जा रही है। यह बात आबकारी विभाग के अधिकारियों को भी पता थी, लेकिन सांठगांठ से यह खेल बरसों तक चलता रहा, जिससे जिले के ग्रामीण क्षेत्रों की शांति भंग हो गई।

ऐसे हो गई गाँवों की शांति भंग:

जब शराब की दुकान केवल लाइसेंस वाली कलारी पर बिकती थी, तो गांव के सुरा प्रेमी उस दुकान तक जाकर शराब लाने में कई बार आलस या संकोच कर जाते थे। जब शराब ठेकेदारों ने हर गांव में कमीशन पर किराने की दुकानों पर शराब बिकवाना शुरू की, तो ग्रामीण शराबी पूरे दिन नशे में धुत्त होकर कभी परिजनों से तो कभी गांव के लोगों से लड़ने लगे। बरसों से अवैध दुकानों का दंश झेल रहीं गांव की महिलाओं का जब आक्रोश फूटा तो शराब ठेकेदारों को दुकान बंद करके अपनी जान बचाने की नौबत तक आ गई।

जब प्रशासनिक अधिकारी बने कार्यकर्ता तो जिले के हालात बिगड़ना ही थे, पुलिस आई एक्शन मोड में

15 August Advertisement
15 August Advertisement
15 August Advertisement
15 August Advertisement
15 August Advertisement
15 August Advertisement
15 August Advertisement
15 August Advertisement
15 August Advertisement
15 August Advertisement
15 August Advertisement
15 August Advertisement
15 August Advertisement
15 August Advertisement
15 August Advertisement
15 August Advertisement
15 August Advertisement
15 August Advertisement
15 August Advertisement

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *