कलेक्टर ने दी सीख: शिव मेडिकल पर मिला एक्सपायरी प्रोटीन पाउडर, रात में किया सील्ड
कलेक्टर ने दी सीख: शिव मेडिकल पर मिला एक्सपायरी प्रोटीन पाउडर, रात में किया सील्ड
मुख्यालय सहित जिले भर के मेडिकल स्टोर्स की कभी नहीं होती जांच, एकमात्र ड्रग इंस्पेक्टर पर अन्य जिलों का भी प्रभार
शिवपुरी। बीती रात स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कोर्ट रोड पर स्थित शिव मेडिकल स्टोर पर आई, तथा उसमें ताले लगाकर सील कर दिया। रात में यह कार्रवाई इसलिए अंजाम दी गई, क्योंकि जिलाधीश ने जो प्रोटीन पाउडर मंगवाया, वो एक्सपायरी हो चुका था। इस कार्रवाई की सूचना जैसे ही शहर के उन मेडिकल स्टोर्स तकनीजब पहुंची, जो इतनी रात में खुले हुए थे, वो भी बंद हो गए। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिला मुख्यालय सहित जिले भर में मेडिकल स्टोर्स पर मनमाने रेट में एवं नशीली दवाओं के अलावा एक्सपायरी मेडिकल सामग्री भी बेची जा रही है, लेकिन उनकी जांच कभी नहीं होती, क्योंकि एकमात्र ड्रग इंस्पेक्टर पर दूसरे जिलों का भी प्रभार है।
कुछ ऐसा हुआ रात में:
बीते मंगलवार की रात लगभग 10 बजे कलेक्टर अर्पित वर्मा ने अपने ड्राइवर से प्रोटीन पाउडर मंगवाया। ड्राइवर ने कोर्ट रोड पर शिव मेडिकल स्टोर से प्रोटीन पाउडर लेकर बंगले की तरफ रवानगी डाल दी। जिलाधीश ने जब लाए गए पाउडर की एक्सपायरी डेट देखी, तो वो निकल चुकी थी, यानि वो पाउडर एक्सपायरी हो गया था। बस फिर क्या था, कुछ ही देर में स्वास्थ्य विभाग के मुखिया सीएमएचओ डॉ. संजय ऋषिश्वर अपने लाव लश्कर के साथ शिव मेडिकल पर पहुंचे तथा उसे सील कर दिया। चूंकि प्रोटीन पाउडर कलेक्टर के लिए गया था, इसलिए कार्यवाही रात में ही अंजाम दी गई, वरना आम आदमी की सुनवाई कहीं नहीं है। मंगलवार को आम और खास का अंतर के दो मामले सामने आए, जिसमें जिलाधीश केंद्रबिंदु रहे।
दवाओं का बड़ा खेल, लुट रहा आमजन:
शिवपुरी जिले में दवाओं का बड़ा खेल हो रहा है। सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने जा रही जिले की जनता को यह डॉक्टर दवा कंपनियों से बड़ी गिफ्ट व कमीशन लेकर महंगी दवाएं लिख रहे हैं। इतना ही नहीं, दवाओं की वास्तविक कीमत बेहद कम होती है, लेकिन उसमें प्रिंट रेट अधिक डलवा कर मरीजों की जेब काटी जा रही है।
थोक के लाइसेंस पर खेरीज की भरमार:
दवाओं का थोक कारोबार करने के लिए किसी विशेष डिप्लोमा की जरूरत नहीं होती, बल्कि 12वीं पास व्यक्ति को यह लाइसेंस मिल जाता है। जबकि खेरीज कारोबार के लिए बी फार्मा डिप्लोमा होना जरूरी है। यदि जिले में मेडिकल स्टोर्स की जांच हो जाए तो थोक के लाइसेंस पर मेडिकल स्टोर्स की भरमार मिलेगी।
दीवाली से पहले होती है वसूली!
सूत्रों की मानें तो ड्रग इंस्पेक्टर कभी भी मेडिकल स्टोर्स की जांच करने नहीं आते। बताते हैं कि दीवाली से एक माह पूर्व इन मेडिकल स्टोर्स से 3 से 5 हजार रुपए की वसूली होती है। जिले में मेडिकल स्टोर्स की संख्या इतनी अधिक है कि सभी दुकानों से वसूली में एक माह का समय लग जाता है।




















