नेता व अधिकारियों के बाद अब दूध के नाम पर कर दिया शिवपुरी की जनता के साथ छलावा
बरसात में पहली बार बढ़े दूध के दाम, जनता को मिलनी थी 150 रु.की राहत, अब 300 देने पड़ेंगे
शिवपुरी। नेता शहर को पेरिस बनाने तथा अधिकारी कोर्ट रोड को आदर्श सड़क बनाने का दावा करके शिवपुरी की 2 लाख आबादी से पहले ही मजाक कर चुके हैं, लेकिन इस बार दूध डेयरी वालों ने जनता की जेब काट ली। बरसात में प्राकृतिक हरा चारा खाने से भैंसों का दूध बढ़ जाने से जनता को दाम में राहत मिलती थी, लेकिन इस बार उल्टे 150 रुपए बढ़ाकर हर महीने जेब पर 300 की चपत लगा दी। जनता को वो ही पानी मिला दूध मिल रहा है, जबकि डेयरी वाले अच्छी क्वालिटी का दूध लेकर उसमें से अपने आइटम अधिक मात्रा में निकालने के बाद जनता को महंगा दूध दे रहे हैं। इस संबंध में सपाक्स के पदाधिकारी महेंद्र दुबे ने कलेक्टर को आवेदन देकर दाम कम करवाने की बात कही है।
ऐसे समझें दूध के नाम पर जनता से छलावा:
बीते गर्मी के मौसम में दूध की आवक कम होने से दाम 50 से 55 रुपए यह कहते हुए बढ़ाए थे कि बरसात में 5 रुपए कम कर देंगे। भले ही शिवपुरी में पिछले वर्षों की तरह झमाझम नहीं हुई, लेकिन बारिश शुरू होने से जंगल में हरियाली बढ़ गई। दूध के दाम 5 रुपए कम होकर 50 रुपए किलो होना थे। इसके विपरीत डेयरी वालों ने दूधियों के साथ मिलकर दाम घटाने की बजाए हर महीने 150 रुपए और अधिक निकालने की योजना बनाई।
खुद को बचाया, जनता पर बोझ बढ़ाया
शिवपुरी शहर के डेयरी वाले दूधियों से दूध लेकर उसमें से क्रीम व फेट निकालकर बचे हुए दूध में बर्फ डालकर पानी वाला दूध जनता को बेचते हैं। जिसके चलते फूड सेफ्टी की जांच में इनका दूध गुणवत्ताविहीन मिलने पर जुर्माना होता है। दूधियों व डेयरी वालों ने मिलकर एक बैठक की, उसमें अधिक फेट वाला यानि कम पानी मिला दूध लेकर जनता को अच्छी गुणवत्ता वाला दूध देने की बात कहकर 55 की जगह 60 रुपए किलो दूध के दाम कर दिए।
छलावे में यह छूटे जनता के सवाल:
उस बैठक में जनता का प्रतिनिधित्व कौन कर रहा था, जिसकी जेब काटने का प्लान बनाया?
डेयरी से दूध लेने के बाद कौन से ग्राहक को फेट नापकर दूध दिया जाता है?
घरों पर आने वाले दूधिए आज भी रास्ते में पड़ने वाले जलस्रोतों का पानी मिलाकर ला रहे हैं, क्या घर पर वो फेट नापकर दे रहे हैं?, क्या घरों पर फेट नापने का उपकरण है?, लेकिन उसने दूध के दाम 60 रुपए किलो कर दिए.. क्यों ?

