प्रोजेक्ट लाने का क्रेडिट लेने वाले, अब फेल होने पर क्यों नहीं आ रहे आगे..?, करोड़ों की बर्बादी
पूरे शहर को खोखला करके जनता को बनाया दमा का मरीज, गिरकर हुए चोटिल, 2 अरब से अधिक सड़कों को बनाने में खर्च
शिवपुरी। शहर में जब भी कोई प्रोजेक्ट आता है तो उसे लाने का क्रेडिट लेने में हमारे माननीय सबसे आगे रहते हैं। अब जबकि सीवर प्रोजेक्ट को उच्च न्यायालय ने फेल मान लिया, तो फिर इसकी फेल्युर्टी की जिम्मेदारी कोई क्यों नहीं ले रहा..?। चारागाह बने इस प्रोजेक्ट में अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों ने अपना हिस्सा लेने पर फोकस रखा, जबकि इसका दंश शहर की जनता को अभी भी भुगतना पड़ रहा है।
झील संरक्षण परियोजना के तहत सांख्य सागर झील (जिसे रामसर साइट में शामिल करके अंतरराष्ट्रीय पहचान दी) को सीवर सहित नालों की गंदगी से मुक्त करके उसे सुंदर और आकर्षित बनाना था। इस झील में जाने वाली सीवर की गंदगी को रोकने के लिए शिवपुरी में सीवर प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ था। 13 साल पूर्व जब यह प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ, तब इसकी लागत 54 करोड़ रुपए थी। दो साल में पूरा होने वाला यह प्रोजेक्ट अभी भी अधूरा होकर फैल हो गया, जिसमें अभी तक शासन के 111 करोड़ रुपए तो खर्च हो चुके हैं। 1 अरब 11 करोड़ रुपए प्रोजेक्ट में खर्च करने के अलावा शिवपुरी शहर को सीवर चैंबर बनाने के फेर में गहराई से खोदकर उसे खोखला कर दिया। लगभग 4 साल तक इस शहर में उड़ने वाली धूल ने हजारों नए दमा के रोगी बना दिए। ऊबड़- खाबड़ सड़कों पर गिरकर सैकड़ों लोग न केवल चोटिल हुए, बल्कि कई ने तो हड्डियां भी तुड़वाई। शहर की जनता इस उम्मीद में कष्ट झेलती रही कि भविष्य में इसका लाभ मिलेगा। प्रोजेक्ट के लिए खोदे गए शहर में सड़कें बनाने में 2 अरब से अधिक की शासकीय राशि खर्च के दी गई, जिसमें कई ठेकेदारों के बारे- न्यारे भी हो गए। इस पूरे खर्चे को जोड़ा जाए तो इस प्रोजेक्ट के फेर में अभी तक लगभग 3 अरब से अधिक की शासकीय धनराशि खर्च हो चुकी है, जनता की टूटफूट एवं दमा का रोग तो ब्याज में मिला।
प्रोजेक्ट में 191 करोड़ की नई डिमांड भी बनाई:
शिवपुरी शहर की जनता को बीमार व अपाहिज बनाने वाले सीवर प्रोजेक्ट का मामला सही समय पर उच्च न्यायालय पहुंच गया, तो इसकी परतें खुलकर सामने आ गई। अन्यथा प्रोजेक्ट को चारागाह बनाने वाली टीम ने तो 191 करोड़ रुपए शासन से लाने के लिए एक और डिमांड पत्र तैयार कर लिया था। हद हो गई प्रोजेक्ट की आड में कमाई की, जनता को भले ही लाभ न मिले, माननीयों व अधिकारियों की जेब भरना चाहिए।
शहर को मिले इस दर्द का जिम्मेदार कौन..?
शिवपुरी शहर की 2 लाख आबादी इस उम्मीद में कष्ट झेलती रही कि सीवर लाइन में कनेक्शन होने के बाद अपने सीवर के चैंबरों की सफाई करवाने वाले कष्टदायक कार्य से निजात मिल जाएगी। प्रोजेक्ट फैल होने से जनता की यह उम्मीद भी टूट गई। आखिर 3 अरब से अधिक शासकीय धनराशि बर्बाद करने एवं जनता को झूठे सपने दिखाने का दोषी कौन है..?। मेरे ख्याल से वो जनप्रतिनिधि, जो कलेक्ट्रेट में समीक्षा बैठक लेकर कागजों में प्रोजेक्ट को सफल मानते हुए अधिकारियों की बातों पर भरोसा करते रहे। यदि वो धरातल पर काम देखते, तो शायद शासन की कुछ धनराशि बच जाती। अब प्रोजेक्ट फैल की जिम्मेदारी लेने कोई आगे क्यों नहीं आ रहा..?

