युवाओं के बाद अब किसान उतरा सड़कों पर, क्या भाजपा के शासनकाल में हर वर्ग परेशान..?

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60113 करोड़ के घोटाले को ढूंढ रही मोहन सरकार के सामने आया किसानो का आंदोलन
शिवपुरी से सैमुअल दास::

कुछ दिन पहले तक हजारों की संख्या में युवा दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश भर में एकजुट हुए। शिक्षा मंत्री का इस्तीफा होने के बाद युवाओं का आंदोलन शांत हुआ तो अब मध्यप्रदेश में किसान सड़क पर उतर आया। पहले युवा और अब किसान, तो क्या भाजपा के शासनकाल में हर वर्ग परेशान है..?। महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रदेश की मोहन सरकार अभी 5 विभागों में हुआ 60113 करोड़ रुपए का घोटाला ढूंढ नहीं पाई कि अब किसानों का आंदोलन शुरू हो गया।
ज्ञात रहे कि मध्यप्रदेश में ग्रामीण विकास के नाम पर आई राशि में से 28 हजार करोड़ रुपए से अधिक का घोटाला कैग की रिपोर्ट में उजागर हुआ है। नेताओं ने ब्यूरोक्रेसी के साथ मिलकर ग्रामीणों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए विभिन्न मदों में आई राशि का ऐसा बंदरबांट किया कि अब जवाब नहीं दे पा रहे। यही वजह है कि कागजों में किसान को संपूर्ण सुख देने का दावा करने वाली सरकार की धरातल पर सच्चाई शून्य है। जिसके चलते अब अन्नदाता भी सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर आया है।
मध्यम वर्ग भी शोषण का शिकार:
देश का माध्यम वर्ग, जो सबसे अधिक है, वो भी सरकार की हिटलरशाही नीतियों से शोषित है। 1100 रुपए का गैस सिलेंडर खरीदने को मजबूर माध्यम वर्ग की बाइक को एथेनॉल वाला महंगा पेट्रोल खराब कर रहा है। महंगाई का दंश झेल रहे इस मध्यम वर्ग के सामने बच्चों को पढ़ाना एवं बीमारियों का इलाज कराना सबसे अधिक कठिन हो रहा है। सरकार के निजीकरण वाले फार्मूले ने सरकारी विभागों में भर्तियां बंद करके प्राइवेट कंपनियों को मैदान में उतार दिया। आउटसोर्स के कर्मचारी से काम करवाने के बाद भी उसे नियमित वेतन के लिए हड़ताल करनी पड़ती है। 15 हजार महीने की सेलरी पर हस्ताक्षर करवा कर 9 से 10 हजार रुपए हाथ में दिए जा रहे हैं।
शिवपुरी से युवा हुए गायब, घरों में बुजुर्ग:
शिवपुरी में रोजगार के कोई साधन न होने की वजह से शिक्षा पूरी करने वाले युवा रोजगार की तलाश में अपना शहर छोड़कर जा चुके हैं। जो युवा बाहर रहकर किसी कॉम्पटीशन की तैयारी कर रहे हैं, वो भी बाहर जॉब ढूंढकर बाहर ही रुक गए हैं। हमारे क्षेत्र के नेता उद्योग धंधे लगाने के सिर्फ दावे करते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि शिवपुरी शहर युवाविहीन हो गया, तथा घरों में बुजुर्ग ही रह गए हैं।

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