दतिया उपचुनाव: कांग्रेस में भीतरघात का शोर, भाजपा नेता साइलेंट, दामोदर कर रहे दावे
भाजपा से प्रदेश सरकार, कांग्रेस के पूर्व सीएम की टीम दांव पर, मिश्रा की दोनों तरफ से हार
शिवपुरी से सैमुअल दास::
दतिया उपचुनाव के परिणामों की उल्टी गिनती शुरू हो गई। सोमवार की दोपहर तक तस्वीर साफ हो जाएगी, लेकिन उससे पहले जो कुछ देखा व सुना, उसमें कांग्रेस के अंदर भीतरघात का शोर खुद प्रत्याशी ने मचा दिया। भाजपा के नेता साइलेंट मोड में हैं, जबकि मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने वाले दामोदर यादव अपनी जीत के दावे करने में कोई परहेज नहीं कर रहे। इस चुनाव में भाजपा की प्रदेश सरकार एवं कांग्रेस के पूर्व सीएम की टीम की साख दांव पर लगी है, लेकिन दोनों ही सूरत में नरोत्तम मिश्रा की हार मानी जा रही है।
दतिया उपचुनावं के मैदान में उतरे प्रत्याशियों की तुलना की जाए तो कांग्रेस के घनश्याम सिंह के मुकाबले भाजपा के आशुतोष तिवारी काफी जूनियर राजनीतिज्ञ हैं। जिसके चलते कांग्रेस का पलड़ा भारी माना जा रहा था, लेकिन जब कांग्रेस प्रत्याशी ने खुद ही पूर्व विधायक राजेंद्र भारती पर भितरघात के आरोप लगाए, तो फिर यह चर्चा भी चल निकली कि भारती पुराने कांग्रेसी हैं, तथा चुनाव में वोट प्रतिशत को प्रभावित करने का माद्दा भी रखते हैं। यदि ऐसा हुआ तो फिर आशुतोष के चांस बढ़ जाएंगे, क्योंकि उनके पक्ष में मुख्यमंत्री से लेकर सरकार के कई मंत्री दतिया में डेरा डाले रहे। हालांकि आशुतोष की राह में मिश्रा समर्थकों का विरोध भी कांटे बिछाने का काम करेगा। एक बड़ा वोटर वर्ग यह भी देखता है कि जिसकी सरकार है, यदि उसका विधायक बनाएंगे तो हमारे भी कुछ काम हो पाएंगे।
कांग्रेस एवं भाजपा के बीच उलझे मैच में आजाद पार्टी के दामोदर यादव भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं, क्योंकि जो जितने वोट वो काटेंगे, उसमें कांग्रेस को अधिक तथा भाजपा को कम नुकसान होगा। इन परिस्थितियों के बीच पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के लिए दोनों ही परिणाम नुकसानदायक होंगे। क्योंकि यदि आशुतोष हारे तो ठीकरा मिश्रा पर ही फूटेगा, और यदि भाजपा जीत गई तो फिर दतिया विधानसभा से भाजपा को एक युवा नेता मिल जाएगा।

