नशे के खिलाफ चल रहे पुलिस प्रयासों में छूट रही काउंसलिंग की कड़ी, इसलिए बच रहे तस्कर

रिटायर्ड डीएसपी बोले: नशेड़ियों से मालूम करें, कौन दे रहा नशा, मुक्ति केंद्र का उपयोग करें, दुरुपयोग नहीं
शिवपुरी में नशे के सौदागरों तक पुलिस नहीं पहुंच रही, या फिर किसी और तरह से उपयोग कर रही है, अन्यथा नशा बंद होने में क्या परेशानी..? यह सवाल मेरा है, जो मैने रिटायर्ड डीएसपी सुरेश सिंह सिकरवार से पूछा। उन्होंने बताया कि पुलिस काउंसलिंग की कड़ी को छोड़ रही है, यदि उस पर ईमानदारी से प्रयास किए जाएं तो नशा इतना बड़ा चैलेंज नहीं है, जितना बना रखा है।
रिटायर्ड डीएसपी सिकरवार का कहना है कि नशेड़ी को पुलिस बोझ समझकर उससे पीछा छुड़ाने का प्रयास करती है। शहर में दो नशा मुक्ति केंद्र चल रहे हैं, जिनमें एक कोलारस के सरदार एवं दूसरा अगम तोमर चला रहा है। इन केंद्रों को 3 लाख रुपए शासकीय डोनेशन दिए जाने की चर्चा है। सिकरवार का कहना है कि इन केंद्रों पर परिवार द्वारा छोड़े गए नशेड़ियों की पुलिस काउंसलिंग करके पूछे कि वो नशा कहां से ला रहे हैं, उन्हें नशे के इंजेक्शन व सीरिंज कौन दे रहा है। इतना ही नहीं परिजनों के मोबाइल सर्विलांस पर डालकर यह पता करें कि जब उनका नशेड़ी बच्चा घर नहीं पहुंचता तो वो किस से फोन करके पूछते हैं। इस दिशा में पुलिस मेहनत कर ले तो नशा उपलब्ध कराने वालों का जुलूस निकाल सकती है।
300 में स्मैक का टिकिट, 80 में गांजे की पुड़िया, सस्ते दामों में एविल के इंजेक्शन उपलब्ध हो रहे हैं, जिस वजह से नशे पर अंकुश नहीं लग पा रहा, तथा आए दिन युवाओं की मौत की खबरें सामने आ रही हैं। पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया यदि इस एंगल पर काम करें तो शिवपुरी को काफी हद तक नशे से मुक्त करने में सफलता प्राप्त कर सकती हैं।




















