शासन के गए 110 करोड़, शहर हुआ खोखला, जनता बनी श्वांस व दमा की मरीज, प्रोजेक्ट फैल

शासन के गए 110 करोड़, शहर हुआ खोखला, जनता बनी श्वांस व दमा की मरीज, प्रोजेक्ट फैल
ट्रीटमेंट प्लांट का बिजली कनेक्शन भी कटा, बिना चले ही मशीनों की खत्म हुई गारंटी, इसका जिम्मेदार कौन?
शिवपुरी। हाईकोर्ट के बाद केंद्रीय मंत्री ने भी शिवपुरी शहर के जिस सीवर प्रोजेक्ट को फेल माना, उसके ट्रीटमेंट प्लांट की भी लाइट काट दी गई। 19 करोड़ 70 लाख की लागत से 9 साल पूर्व बने ट्रीटमेंट प्लांट में लगी मशीनों की गारंटी भी बिना चले ही खत्म हो गई, क्योंकि उनकी 5 साल की गारंटी थी। महत्वपूर्ण बात यह है कि जब सौगात दिलवाने का क्रेडिट लेने के लिए हमारे क्षेत के नेता सबसे आगे होते हैं, तो फिर इस फैल हुए प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी कौन लेगा..?
हमारे क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने शिवपुरी शहर की जनता के लिए 2 बड़ी सौगातें दिलवाई थीं। जिसमें सिंध जलावर्धन योजना (जो जलक्रांति आंदोलन के बाद पूरी हुई) तथा झील संरक्षण परियोजना के तहत सीवर प्रोजेक्ट। चूंकि शिवपुरी शहर में सिंधिया स्टेट के समय डाली गई 15 किमी की सीवर लाइन कई जगह चौक हो गई थी, तथा आबादी बढ़ने से यह समस्या अधिक विकराल है। सीवर की गंदगी नालों के माध्यम से जाधव सागर तालाब, कर्बला होते हुए चांदपाठा झील (रामसर साइट में शामिल) में पहुंच रही है। इस गंदगी को रोकने एवं शहर की जनता को सीवर की समस्या से निजात दिलाने के लिए सीवर प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ था।
दो साल में पूरा करने का एग्रीमेंट करने के बाद 15 साल बाद भी यह न केवल अधूरा रहा, बल्कि वो फेल भी हो गया। इस प्रोजेक्ट को लाने का श्रेय लेने में हमारे नेता सबसे आगे रहे, लेकिन इसकी मॉनिटरिंग किसी ने नहीं की। अधिकारियों ने इसे चारागाह समझकर जमकर माल कमाया तथा पूर्व पीएचई ईई एसएल बाथम के खिलाफ लोकायुक्त में मामला भी दर्ज हो गया। यह प्रोजेक्ट इसलिए फेल हो गया, क्योंकि नेता इसकी आड में अपनी ब्रांडिंग करते रहे, तथा अधिकारी अपनी हिस्सेदारी के नाम पर करोड़ों की चपत लगाकर अपना घर भरते रहे। ट्रीटमेंट प्लांट पर बिजली कंपनी का 1 करोड़ से अधिक राशि का बिजली बिल बकाया है।
शहर को खोखला व जनता को किया बीमार:
सीवर प्रोजेक्ट के फेर में शिवपुरी शहर की मुख्य सड़कों, बाजार एवं कालोनियों में गहराई तक खुदाई करके खोखला कर दिया गया। जो चेंबर बनाए गए उनकी गुणवत्ता कमजोर होने एवं उनके ढक्कन ऊंचे-नीचे होने से शहर की जनता के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। बरसों तक खुद शहर में उड़ती धूल ने दमा और श्वास के मरीज बढ़ा दिए। इसके अलावा खुदे शहर में गिरकर कई लोग चोटिल होकर स्थाई दिव्यांगता के शिकार भी हो गए। शहर को तहस नहस करने के बाद यह प्रोजेक्ट फेल हो गया। इसमें शहर की जनता का क्या कसूर है..?




















