देश के निहत्थे बच्चों से इतना खौफजदा हुए बड़े नेता, पुलिस के संरक्षण में उतारे डंडे वाले गुंडे

नारी सम्मान की बात करने वालों ने बच्चियों व महिलाओं की इज्जत को सरेराह किया तार-तार
शिवपुरी से सैमुअल दास::
धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू कश्मीर के पहलगांव में बीते 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकवादी हमले में 24 सैलानियों की जान चली गई थी। महत्वपूर्ण बात यह है कि सैलानियों की भीड़ वाले इस टूरिस्ट प्लेस पर सुरक्षा के नाम पर एक डंडे वाला सिपाही भी तैनात नहीं था। इसके उलट हमारे देश के ही युवाओं से सरकार के बड़े नेता इतने डर गए कि 50 हजार पुलिसकर्मी दिल्ली में तैनात कर दिए। इसके बाद भी जब नेताओं को अपनी सुरक्षा कम लगी तो डंडे वाले गुंडों को पुलिस के संरक्षण में उतार दिया। महत्वपूर्ण बात यह है कि नारी सम्मान के दावे करने वाली सरकार ने राजधानी की सड़कों पर युवतियों एवं महिलाओं की इज्जत को सरेराह तार-तार कर दिया। इस दौरान कुछ पुलिसकर्मी तो जान बूझकर युवतियों से लिपटते चिपटते भी वीडियो में नजर आ रहे हैं।
लोकतंत्र यानी लोगों का तंत्र, जिसमें पुलिस को समाजिक सुरक्षा के लिए तथा देश की रक्षा के लिए बीएसएफ, आर्मी, सीआरपीएफ एवं आईटीबीपी तैनात रहती है। लोकतंत्र में आमजन को सबसे बड़ी ताकत वोट की दी है, तथा हर 5 साल बाद नेताओं को इसी ताकत के सामने अपनी कमर झुकाकर जनता के सामने हाथ जोड़ने पड़ते हैं। देशवासियों को दी गई इस ताकत की मॉनिटरिंग के लिए चुनाव आयोग नाम की एक संस्था को बनाया गया। निष्पक्ष चुनाव आयोग की ताकत को टीएन शेषन से लेकर एमएस गिल तक नजर आई, लेकिन वर्तमान में मुख्य चुनाव आयुक्त ही सरकार के षड्यंत्र में शामिल हो गए। चुनाव आयोग से सरकार की इस सांठगांठ को इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर ने ओपन क्या किया, पूरे देश में उबाल आ गया। लोकतंत्र में जनता को दी गई इस ताकत के साथ जब छेड़छाड़ करने का राजफाश हुआ तो आमजन के साथ देश का युवा आक्रोशित हो गया। जिसका विरोध करने के लिए जब देश की जनता एकजुट हुई तो बड़े नेता इतने भयभीत हो गए कि सामाजिक सुरक्षा के लिए तैनात रहने वाली पुलिस को यह कहकर मैदान में उतार दिया कि विरोध करने वाले देशद्रोही हैं।
यह बात हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि जो वीडियो दिल्ली की सड़कों से सामने आए हैं, उसमें पुलिस ने अपने ही देश के लोगों के साथ देशद्रोहियों जैसा व्यवहार किया। एक वीडियो में दो लड़कियां एक-दूसरे को पकड़े हुए हैं, जिन्हें पुलिस वालों ने पैर पकड़कर अमानवीय तरीके से खींचकर अलग किया। एक महिला रिपोर्टर को पुलिस वाले टांगकर बस के अंदर तक ले गए, जबकि वो रोते हुए अपना कार्ड दिखाती रही। एक पुलिसकर्मी दोनों हाथ ऊपर करके भीड़ में फंसी लड़की से जान बूझकर चिपटते हुए नजर आ रहा था। डंडे वाले गुंडे मीडियाकर्मियों को खुलेआम धमका रहे थे, तथा पुलिस उनकी सुरक्षा में तैनात रहे। शर्मसार करने वाली यह सभी घटनाएं देश की राजधानी में घटित हुईं।




















