नाना ने जैसा फिल्मों में निभाया बिंदास किरदार, रियल लाइफ़ में मदद के लिए सदैव रहते थे तैयार

नाना ने जैसा फिल्मों में निभाया बिंदास किरदार, रियल लाइफ़ में मदद के लिए सदैव रहते थे तैयार
अपनी कमाई का 90 फीसदी हिस्सा देते थे चैरिटी में, कारगिल युद्ध में सेना की थी ज्वाइन
शिवपुरी से सैमुअल दास::
हमारा देश इसलिए भी महान है, क्योंकि उसमें नाना पाटेकर जैसे लोगों ने जन्म लिया, जो देश व जरूरतमंद की सेवा करते हुए दुनिया छोड़ गए। 8 अक्टूबर 2026 को फिल्मी दुनिया का यह बेताज बादशाह हमेशा के लिए चुप हो गया, तथा अपने पीछे छोड़ गया वो यादें जो दशकों तक लोग भूल नहीं पाएंगे।
फिल्मों में नाना पाटेकर का किरदार बिंदास बोलने वाला तथा देशभक्ति से ओतप्रोत एवं समाज को सीख देने वाला रहा। नाना की सादगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वो फिल्म की शूटिंग के बाद मिलने वाला समय अपने गांव में खेतों पर काम करके बिताया करते थे। उनके परम मित्र रहे अनूप जलोटा बता रहे थे कि नाना अपनी कमाई का 90 फीसदी हिस्सा चैरिटी (समाजसेवी संस्थाओं) में दिया करते थे, तथा 10 प्रतिशत राशि ही अपने व परिवार पर खर्च करते थे। वो अपने गांव में लोगों की मदद करते थे तथा सादा कपड़ों और कई बार स्लीपर में ही कार्यक्रमों में पहुंच जाते थे। फिल्म अभिनेता रजा मुराद भी बताते हैं कि नाना ने अपने उसूलों से कभी समझौता नहीं किया, फिल्म में काम करने का जितना माँगा उतना ही लिया, लेकिन बाद में 90 प्रतिशत चैरिटी में देकर हर जरूरतमंद की मदद के लिए सबसे आगे बढ़कर काम किया।
कारगिल युद्ध में बने सैनिक:
नाना पाटेकर की तिरंगा से लेकर अन्य कई फिल्मों में एक्टर के रूप में देशभक्ति नजर आई, जबकि उनके दिल में देश के प्रति कुछ कर गुजरने का जज्बा था। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने सेना में शामिल होकर युद्ध में जाने की इच्छा जाहिर की, लेकिन तत्कालीन रक्षा मंत्री जार्ज फर्नांडीज ने जब उन्हें नियमों का हवाला देकर सेना में न लेने की बात कही तो नाना पाटेकर ने अपनी 3 वर्षीय मराठा ट्रेनिंग के बारे में बताया, तब कहीं उन्हें कारगिल युद्ध में शामिल होने का मौका मिल सका। यानि नाना न केवल एक सहृदय व दूसरों की मदद करने वाले एक अच्छे इंसान थे, बल्कि देशभक्ति भी उनमें कूट कूटकर भरी हुई थी। उन्हें शत-शत नमन..जय हिंद 🙏🙏




















