प्रशासन की रूटीन वार्षिक कार्यवाही: मेडिकल कॉलेज के सामने से हटाईं आधा सैकड़ा दुकानें

सरकारी को निजी बताकर लाखों की वसूली करने वाले ने साध रखे थे जिम्मेदार अधिकारी
शिवपुरी। जिला प्रशासन एवं पुलिस ने मंगलवार को अपनी वार्षिक रूटीन कार्यवाही करते हुए मेडिकल कॉलेज के सामने से आधा सैकड़ा दुकानों को जेसीबी से समेट दिया। पीड़ित दुकानदारों ने बताया कि चतुर्भुज बघेल नाम के शख्स ने उक्त जमीन को निजी बताकर 50 हजार की पगड़ी व 5 हजार रुपए महीना किराए पर चाय की स्टॉल वाले को जगह दी थी। ऐसी कई बड़ी-छोटी दुकानों से लाखों की वसूली करने वाले चतुर्भुज ने स्थानीय जिम्मेदार अधिकारियों को भी सेट कर लिया था, इसलिए यह अतिक्रमण तेजी से बढ़ता गया। अब जबकि डंडा ऊपर से चला तो हर महीने वसूली में हिस्सेदार बने जिम्मेदार अधिकारी ही अमला लेकर कब्जे हटाने पहुंच गए।
आज सुबह से ही प्रशासनिक टीम नगरपालिका का अमला लेकर पुलिस के साथ मेडिकल कॉलेज के सामने पहुंची। बिना कोई सूचना के ही जेसीबी ने जब पंजा चलाया तो दुकानदारों ने उतनी ही फुर्ती में अपना सामान समेटना शुरू कर दिया। मेडिकल कॉलेज के सामने लगभग आधा सैकड़ा छोटी-बडी दुकानों को तोड़कर जमींदोज कर दिया गया। इनमें चाय-नाश्ता से लेकर मेडिकल स्टोर तक को समेट दिया गया।
जिस समय अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की गई, उस समय पुलिस के अलावा फॉरेस्ट के कर्मचारियों को भी सुरक्षा के मद्देनजर तैनात किया गया था। मेडिकल कॉलेज के सामने अतिक्रमण हटाने के अलावा हाउसिंग बोर्ड कालोनी में खोली गईं दुकानों के आगे के चबूतरे भी जेसीबी से तोड़ दिए गए। इस दौरान दुकानदारों में पगड़ी लेने व किराया वसूलने वाले के अलावा क्षेत्रीय सांसद के खिलाफ नाराजगी भी देखी गई।
कार्यवाही के बीच यह भी बड़े सवाल:
जब पहली स्टॉल रखी जाती है, तब ही नपा या प्रशासन के अधिकारी उसे क्यों नहीं रोकते?
हर साल अतिक्रमण करके 50 से अधिक दुकान लग जाती हैं तो फिर उन्हें क्यों तोड़ते हैं?
क्या दुकानदारों से पगड़ी व किराया वसूलने वाला शख्स हर महीने नपा व प्रशासन के अधिकारियों को महीना देता है?
क्या उन जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही नहीं होना चाहिए, जिनकी शह पर अतिक्रमण हुए?




















