जिले में माफियाराज हावी: गरीबों का राशन बाजार में बेचकर मुनाफा कमा रहा रसद माफिया
जिले में माफियाराज हावी: गरीबों का राशन बाजार में बेचकर मुनाफा कमा रहा रसद माफिया
एक दिन पहले दीगोद के सेल्समैन को भिजवाया जेल, आज बरेला में ग्रामीणों ने किया चक्काजाम
शिवपुरी। जिले में माफियाराज कुछ इस तरह हावी है कि भूमाफिया, जंगल माफिया, खनन माफिया के साथ रसद माफिया तो गरीबों का राशन डकार रहे हैं। एक दिन पूर्व शुक्रवार को ही कलेक्टर के निर्देश पर कोलारस विधानसभा के दीगोद गांव के सेल्समैन के खिलाफ जेल भेजने की कार्यवाही की गई, तो वहीं खोड के बरेला गांव के ग्रामीणों ने राशन न मिलने की शिकायत करते हुए चक्काजाम कर दिया। इतना ही नहीं, ग्रामीण तो रसद माफिया को नेताओं का संरक्षण होने का आरोप भी लगा रहे हैं।
मेरे संसदीय क्षेत्र में माफियाराज नहीं चलेगा, यह घोषणा कोलारस में आयोजित एक कार्यक्रम में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चुनाव जीतने के बाद अपने पहली धन्यवाद सभा में कही थी। जब क्षेत्र के कद्दावर नेता की ऐसी कोई घोषणा होती है, तो आमजन यह उम्मीद कर ही बैठता है कि शायद जिले से माफियाराज खत्म हो जाएगा। उस घोषणा को हुए दो वर्ष गुजर गए, लेकिन किसी भी तरह के माफियाराज पर कोई एक्शन नहीं हो पाया। जिले में अन्य माफियाओं के साथ रसद माफिया पूरी तरह से सक्रिय हैं, क्योंकि महंगाई के इस दौर में गरीबों के लिए आने वाले राशन को बाजार में बेचकर माफिया बड़ा मुनाफा कमा रहे हैं। हद तो तब हो जाती है कि जब कोलारस विधानसभा के ग्राम दीगोद में एक-दो नहीं बल्कि 4 माह का राशन रसद माफिया ने बाजार में ठिकाने लगाकर अपनी जेब तो भर ली, लेकिन गरीबों के मुंह से निवाला छीन लिया। शुक्रवार को जन विश्वास कार्यक्रम में कोलारस पहुंचे कलेक्टर अर्पित वर्मा ने उक्त चार माह का राशन डकारने वाले सेल्समैन दिलीप जाटव को जेल पहुंचाने के निर्देश दिए।
खोड के ग्राम बरेला में राशन न मिलने से गुस्साए महिला-पुरुषों ने चक्काजाम कर दिया। नाराज एक ग्रामीण ने शिवपुरी विधायक पर सेल्समैन को संरक्षण देने का आरोप भी सार्वजनिक तौर पर लगाया। उसका कहना था कि हमने पहले ही शिवपुरी विधायक देवेंद्र जैन को शिकायती आवेदन देकर सेल्समैन हटाने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने सुनवाई नहीं की।
राजनीतिक संरक्षण में ही पनप रहा माफिया:
जिले में रेट-पत्थर के अवैध उत्खनन से लेकर जमीनों पर कब्जे तथा जंगलों की कटाई करने व गरीबों का राशन डकारने वाले माफिया को अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक संरक्षण प्राप्त रहता है। जिसके चलते ही वो अपने काम को बखूबी अंजाम देते हैं। रसद माफिया की करतूतों की शिकायत हर मंगलवार को कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में आती है।




















