कलेक्टर कार्यालय से जारी होने वाले जांच के आदेश अधिकारियों की लापरवाही से अटके
कोलारस के वेयर हाउस में मिली खाद की जांच पूरी होने का दावा, जिम की जांच अभी अटकी
शिवपुरी। कलेक्टर कार्यालय में होने वाली शिकायतों पर जांच के आदेश तो होते हैं, लेकिन बनाई जाने वाली टीम की लेटलतीफी से शिकायतकर्ता इंतजार ही करता रहता है। बीते जून माह में कोलारस में भाजपा नेता के वेयर हाउस में मिले खाद से भरे ट्रक की जांच पूरी होने का दावा किया जा रहा है, जबकि शिवपुरी शहर में जिम के अधिक भुगतान की जांच अभी अटकी हुई है। शिकायत करने वाले पार्षद भी जांच कमेटी में शामिल अधिकारियों के दफ्तरों में चक्कर लगा रहे हैं।
गौरतलब है कि जिले में खाद की किल्लत हमेशा बनी रहती है, ऐसे में कोलारस के भाजपा नेता रविंद्र शिवहरे के वेयर हाउस परिसर में खाद के कट्टों से आधा भरा ट्रक पुलिस व प्रशासन ने जब्त किया था। इस मामले की शिकायत कलेक्टर से किए जाने के बाद एसडीएम कोलारस के नेतृत्व में एक जांच टीम बनाकर 7 दिन में रिपोर्ट मांगी गई थी। वो जांच रिपोर्ट जब सार्वजनिक नहीं की गई तो हमने डेढ़ माह बाद एसडीएम कोलारस अनूप श्रीवास्तव से उस संबंध में बात की। जिसमें एसडीएम का कहना है कि उक्त खाद शिवपुरी के एक व्यक्ति ने मंगवाई थी, लेकिन जिसने मंगवाई थी, वो उस खाद को बेचने की पात्रता नहीं रखता था। इसके अलावा ट्रक को रास्ते में रोककर खाद निकालने वाले 3-4 लोग भी चिन्हित हो गए थे, जिनके खिलाफ एफआईआर की गई है। उन्होंने कहा कि वेयर हाउस ऑनर का सीधे कोई कनेक्शन नहीं मिला है, लेकिन वेयर हाउस केयर टेकर की संलिप्तता जरूर हो सकती है, तभी ट्रक उस परिसर में रोका गया था। इस कार्यवाही का कोई प्रेस नोट जनसंपर्क से जारी नहीं किया गया था।
अब हम बात करते हैं शिवपुरी शहर के वार्ड क्रमांक 19 सावरकर पार्क में खोली गई जिम में उपलब्ध कराई गई सामग्री वाले मामले की। जिसमें 14 लाख की जिम सामग्री खरीदे जाने के बदले में 38 लाख रुपए का भुगतान नगरपालिका शिवपुरी ने किया है। यानि लगभग तीन गुना अधिक राशि का भुगतान नपा के कर्ताधर्ताओं ने सांठगांठ करके किया है। शिकायतकर्ता पार्षदों ने इस खेल में पूर्व नपा सीएमओ इशांक धाकड़, एई सचिन चौहान, ईई मनोहर बागड़ी एवं उपयंत्री भार्गव की संलिप्तता का आरोप लगाया है। इस मामले की शिकायत करने के बाद कलेक्टर ने चार सदस्यीय कमेटी बनाकर 3 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश जारी कर दिया था। इस आदेश को जारी हुए ही 6 दिन गुजर गए, लेकिन अभी तक जांच की शुरुआत ही नहीं हो पाई।
शिकायतकर्ता पार्षद विजय बिंदास से जब पूछा तो वे बोले कि हमने एसडीएम शिवपुरी से बात की तो वे बोले कि जांच जिला पंचायत सीईओ के नेतृत्व में करनी है, जब सीईओ जिप से मिलने गए तो वो आफिस में थे ही नहीं। जब कलेक्टर के आदेश भी ऐसे हवा होते रहेंगे तो फिर जांच पर आमजन का भरोसा कैसे हो पाएगा..?




















