शैक्षणिक व्यवस्था: जो खुद ही लड़खड़ा रहे, उनके हाथों में देश का भविष्य कैसे संवरेगा?
करेरा में स्थिति अधिक गम्भीर, पहले विधायक के हाथ में नजर आई थी बोतल, अब नशे में शिक्षक
शिवपुरी। जिनके पैर नशे की हालत में लड़खड़ा रहे हों, उनके हाथों में देश का भविष्य कैसे संवर सकता है। शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले सरकारी स्कूलों में जब शिक्षक शराब और मछली पार्टी कर रहे हों तो उसे देखकर बच्चे क्या सीखेंगे?, इस सवाल का जवाब खुद वो ग्रामीण नशे की हालत में घूम रहे शासकीय शिक्षक से पूछ रहे हैं। शासकीय स्कूलों में सबसे अधिक हालत करेरा ब्लॉक में खराब है।
शिवपुरी जिले में शैक्षणिक व्यवस्था चारों खाने चित्त है, क्योंकि उन पर नियंत्रण रखने वाले खुद की कुर्सी बचाने में लगे हुए हैं। शायद इसलिए वो जिले में शिक्षण व्यवस्था को बेहतर नहीं कर पा रहे। मंगलवार को करेरा के बीएसी ने जब दो स्कूलों का निरीक्षण किया था, तो प्रधानाध्यापक ऑनलाइन हाजिरी लगाकर गायब थे, तथा स्कूल का रिकॉर्ड भी सीएसी के घर पर होने की बात बताई गई।
इसी बीच करेरा के ग्राम लालपुर के शासकीय माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ शिक्षक राकेश बाथम नशे की हालत में स्कूल से बाहर निकलकर गांव की सड़क पर घूमते मिले। बच्चों ने अपने अभिभावकों को बताया कि स्कूल में उक्त शिक्षक ने मछली भी खाई थी। यानि विभाग सोच रहा है कि शिक्षक स्कूल में पढ़ाने जा रहे हैं, जबकि वो तो उसमें शराब पार्टी मना रहे हैं। यूं तो जिला मुख्यालय के कई शासकीय स्कूल छुट्टी होने के बाद नशेड़ियों का अड्डा बन जाते हैं, लेकिन जब खुद शिक्षक ही स्कूल में पार्टी कर रहे हों, तो फिर शासकीय स्कूल में शिक्षण व्यवस्था को आसानी से समझा जा सकता है।
वेतन हजारों रुपए, पढ़ाई शून्य, प्राइवेट में उल्टा:
शासकीय शिक्षकों को सरकार 40 हजार से लेकर 80 हजार रुपए तक मासिक वेतन दे रही है। जिसके बदले में यह शिक्षक बच्चों को कितना पढ़ा रहे हैं, यह तो आप अपने आसपास के किसी भी सरकारी स्कूल में जाकर देख सकते हो। सीएम राइज एवं उत्कृष्ट विद्यालय के अलावा कुछ सरकारी स्कूलों में स्थिति फिर भी ठीक है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। शायद यही वजह है कि प्राइवेट स्कूलों की बाढ़ सी आ गई, तथा हर खुलने वाला स्कूल सफल भी हो रहा है, क्योंकि हर अभिभावक अपने बच्चे का बेहतर भविष्य बनाना चाहता है। सरकारी शिक्षकों की तुलना में प्राइवेट शिक्षक को 4 से 10 हजार रुपए ही पगार मिलती है, जिस्मों वो पूरी मेहनत से बच्चों को पढ़ाता है, ताकि उसकी नौकरी आगे भी चलती रहे।

