आत्महत्या से पहले सुसाइड नोट अपनी एफबी आईडी पर डाला, ताऊ व भाई को बताया दोषी

आत्महत्या से पहले सुसाइड नोट अपनी एफबी आईडी पर डाला, ताऊ व भाई को बताया दोषी

फर्जी जनपद कर्मचारी बनकर संबल योजना में 25 हजार की ठगी, जिला अस्पताल में काटी जेब

शिवपुरी। जिले के कोलारस थाना क्षेत्र के ग्राम मोहराई में एक 35 वर्षीय ग्रामीण ने बीती रात फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। मरने से पहले सुसाइड नोट अपनी एफबी आईडी पर डाल गया था, जिसमें उसने अपने ताऊ, उसके लड़के व अपने छोटे भाई को दोषी बताया। वहीं पोहरी जनपद के ग्राम अहेरा के एक आदिवासी के साथ दो युवकों ने ठगी कर ली। उधर जिला अस्पताल में एक पीड़ित ने जेबकतरे को दबोच लिया।

सुसाइड नोट डाल कर दुनिया छोड़ी:

कोलारस के ग्राम मोहराई में रहने वाला उत्तम धाकड़ (35) ने गुरुवार की रात लगभग 9 बजे अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट में अपने ताऊ कैलाश धाकड़, उसके पुत्र कमता धाकड़ एवं छोटे भाई रामेश्वर धाकड़ पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। उसने उधारी वालों से रुपए बच्चों को वापस करने की बात भी लिखी है। मृतक के साले विष्णु धाकड़ ने बताया कि जमीन के मामले में उक्त लोग उसके जीजा को मानसिक रूप से परेशान कर रहे थे। सुसाइड के बाद मृतक के परिजनों ने उसके मोबाइल से डाले गए सुसाइड नोट को डिलीट के दिया, लेकिन मृतक वो सुसाइड नोट अपने कुछ परिचितों को भी भेज चुका था।

फर्जी जनपद कर्मचारी बनकर ठगा:

पोहरी जनपद की ग्राम पंचायत अहेरा में रहने वाले कमलफूल आदिवासी की पत्नी सोमवती की मृत्यु के बाद उसे संबल योजना के 2 लाख रुपए मिलने थे। जिसकी कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पोहरी किले में रहने वाले जाहिद खान एवं आफताब खान ने खुद को जनपद का कर्मचारी बताकर उससे 25 हजार रुपए वसूल लिए। चूंकि जिले में बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता, इसलिए कमलफूल ने उन्हें वो राशि दे दी थी। बीते 22 जुलाई को जब पंचायत सचिव नंदकिशोर गुप्ता ने कमलफूल से संबल योजना की राशि के संबंध में बताया तो उसने सचिव को 25 हजार की रिश्वत के बारे में बताया। पोहरी थाना पुलिस ने उक्त दोनों युवकों के खिलाफ ठगी का प्रकरण दर्ज कर लिया है।

जिला अस्पताल में जेबकतरा दबोचा:

नरवर के गणेश बाजार में रहने वाले केशव राठौर अपनी पत्नी दीक्षा को प्रसव के लिए 20 जुलाई को जिला अस्पताल लेकर आए थे। केशव जब पर्चा बनवा रहे थे, तभी उनकी पीछे की जेब में रखे 10 हजार रुपए एक जेबकतरे ने निकाल लिए थे। जेब कट जाने के बाद केशव ने जब अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज दिखवाए तो उन्हें जेबकतरा नजर आ गया। चूंकि वो अस्पताल में प्रसव के लिए रुके थे, इसलिए वो जेबकतरे को भी ढूंढ रहे थे। आज जब वो जेबकतरा नजर आया तो केशव ने उसे पकड़ लिया। जेबकतरा युवक विशाल शाक्य निवासी फिजिकल का बताया जा रहा है, जिसे पुलिस के हवाले कर दिया।

आत्महत्या से पहले सुसाइड नोट अपनी एफबी आईडी पर डाला, ताऊ व भाई को बताया दोषी
सोशल मीडिया ने हिला दिया, गोदी मीडिया को भी नहीं था अंदाजा कि ऐसी होगी फजीहत

सोशल मीडिया ने हिला दिया, गोदी मीडिया को भी नहीं था अंदाजा कि ऐसी होगी फजीहत

आका के इशारे पर चलने वाली दिल्ली पुलिस को भी समझ आएगा बच्चों पर बर्बरता का परिणाम

शिवपुरी से सैमुअल दास::
समय बड़ा बलवान होता है। जब यह बदलता है तो अच्छे-अच्छे अर्श से फर्श पर आ जाते हैं। देश के युवा के आक्रोश को जिन नेताओं ने सोशल मीडिया का मुद्दा समझा, आज उनके तोते उड़े हुए हैं। उन्हें लगता था कि गोदी मीडिया हमारे साथ है तो सोशल मीडिया की नाराजगी दो दिन बाद खत्म हो जाएगी, लेकिन वो यह भूल गए कि देश की जनता के साथ- साथ युवाओं के सब्र का बांध अब टूटने पर है। बस इसी चूक ने पूरे देश को एक सूत्र में पिरोकर रख दिया, तथा देश के नेताओं की नींद उड़ा दी।
हर भारतीय के खाते में आएंगे 20 लाख रुपए, काला धन वापस आएगा, महंगाई कम होगी, हर वर्ष 2 लाख युवाओं को रोजगार मिलेगा, अच्छे दिन आएंगे, जैसे न जाने कितने जुमले बोलकर सत्ता में आए। कुर्सी पर विराजते ही सीबीआई, आईडी, चुनाव आयोग सहित महत्वपूर्ण एजेंसियों को अपना पिठ्ठू बनाकर मीडिया हाउस को खरीद लिया। फिर शुरू हुआ आमजन के शोषण और गोदी मीडिया के माध्यम से अपना गुणगान। स्थिति यह बनी कि देश के लोगों ने न्यूज चैनलों को देखना ही बंद कर दिया, क्योंकि उसमें भी अंधभक्ति के गीत हर समय सुनाई दे रहे थे। हमारे देश के नेता यह भूल गए कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है, तथा जिस दिन युवा जागा तो फिर उनकी नींद उड़ा देगा। बस यही चूक उन्हें भारी पड़ गई। नीट का पेपर लीक हुआ, और उसे लीक करने वाला भी भाजपा नेता ही निकला था। युवाओं से परीक्षा के नाम पर मानसिक मेहनत करवाने के साथ अभिवावकों की जेब काटकर नेता जब अपनी जेब भरने लगे, तो फिर युवा इसे बर्दाश्त नहीं कर पाया। रही सही कसर चीफ जस्टिस ने युवाओं को कोकरोच कहकर पूरी कर दी। हालांकि जब कोकरोच जनता पार्टी के हर दिन लाखों फॉलोवर्स बढ़े तो राजनीति के जानकार समझ गए थे कि देश के आक्रोश को एक प्लेटफार्म मिल गया है, लेकिन हमारे देश के नेता गोदी मीडिया को कब्जे में करके अपने स्तुति गान करवाते रहे। युवाओं पर पुलिस की बर्बरता को देखकर हाईकोर्ट दिल्ली से लेकर सुप्रीम कोर्ट के वकील भी युवाओं का साथ देने मैदान में आ गए। बस फिर क्या था, नेताओं को आरामदायक गद्दों पर भी नींद नहीं आई।

अन्ना की जगह आए वांगचुक::

वर्ष 2014 में अन्ना हजारे ने जब दिल्ली में अनशन किया तो देश का माहौल बदल गया था। 12 साल बाद उसी दिल्ली में अन्ना की जगह वांगचुक ने धरना दिया। इधर रातोंरात दिल्ली के कमिश्नर बदले गए तथा पुलिस ने वांगचुक को परदेदारी में अनशन से उठाकर अस्पताल में भर्ती करवा दिया। अपने आका के इशारे पर दिल्ली पुलिस एक के बाद एक गलती करती गई, तथा सबसे बड़ी चूक 20 जुलाई को लाठीचार्ज करके पुलिस ने कर दी। छात्र-छात्राओं की बर्बरतापूर्ण पिटाई के वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुए तो उसने हर युवा व अभिभावक को अंदर तक झकझोर कर रख दिया। हालात ऐसे बिगड़े कि गुरुवार की रात 12 बजे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करना पड़ा।

गोदी मीडिया की फजीहत तय थी::

दिल्ली में 20 मार्च को हुए लाठीचार्ज ने जहां एक तरफ हर देशवासी को हिलाकर रख दिया था, तो वहीं सरकार का गुणगान करने वाली गोदी मीडिया आंदोलन करने वाले युवाओं को आतंकवादी घोषित करने का प्रयास कर रही थी। अपने हक की लड़ाई लड़ते हुए पुलिस के कील वाले डंडे खाकर लहूलुहान होने वाले युवाओं ने जब गोदी मीडिया की इस हरकत को देखा, तो फिर दिल्ली में मीडियाकर्मियों के साथ जो हुआ, वो तो होना ही था। मैं खुद लगभग सभी बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुका हूं, इसलिए मुझे पता है कि नेताओं के हाथों यह मीडिया हाउस कैसे बिक चुके हैं। अब इन्हें मीडिया या चौथा स्तंभ भी न कहकर सरकार के पार्टनर कहना ज्यादा उचित होगा।

सोशल मीडिया ने हिला दिया, गोदी मीडिया को भी नहीं था अंदाजा कि ऐसी होगी फजीहत
जुलाई के बचे 7 दिन, जल संरचनाओं में 50 फीसदी पानी, खरीफ में नहरों से सिंचाई पर रोक

जुलाई के बचे 7 दिन, जल संरचनाओं में 50 फीसदी पानी, खरीफ में नहरों से सिंचाई पर रोक

पेयजल के लिए पानी संरक्षित रखना जरूरी, आने वाले दिनों में बारिश हुई, तो करेंगे निर्णय

शिवपुरी। जुलाई माह को खत्म होने में अब महज 7 दिन शेष हैं, बावजूद इसके शिवपुरी जिले के बड़े जलाशयों में पानी औसतन 50 फीसदी ही मौजूद है। इनमें से मड़ीखेड़ा डैम से शिवपुरी शहर को पेयजल सप्लाई होता है, जिसके लिए जल संरक्षण जरूरी है। जल संरचनाओं में पानी कम होने की वजह से जिला प्रशासन ने यह निर्णय लिया है कि फिलहाल खरीफ फसलों के लिए नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाएगा। यदि आने वाले दिनों में बारिश हुई तथा जल संरचनाओं में वाटर लेबल बढ़ा तो फिर नहरों में पानी छोड़ने के लिए बैठक में विचार किया जाएगा। यह निर्णय शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित जल उपयोगिता समिति की बैठक में कलेक्टर अर्पित वर्मा ने कही। बैठक में खरीफ एवं रबी सिंचाई, पेयजल आरक्षण, जलाशयों में उपलब्ध जल की स्थिति तथा आगामी मौसम की संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विस्तृत समीक्षा की गई।

जिले के जलाशयों की वर्तमान स्थिति:

अटल सागर (मड़ीखेड़ा बांध) में 484.32 एमसीएम (58.01 प्रतिशत), मोहिनी पिकअप वियर में 32.58 एमसीएम (32.67 प्रतिशत) तथा हरसी बांध में 261.39 एमसीएम (57.87 प्रतिशत) जल उपलब्ध है। तकनीकी रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमान तथा सुपर एल-नीनो के प्रभाव के कारण इस वर्ष क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे अटल सागर बांध का जल स्तर निर्धारित ‘रूल कर्व’ से नीचे बना हुआ है।

नहरों का संचालन उपयुक्त नहीं:

तकनीकी विश्लेषण के आधार पर बताया गया कि वर्तमान जल उपलब्धता से खरीफ मौसम में नहरों का संचालन करना व्यवहारिक एवं तकनीकी दृष्टि से उपयुक्त नहीं है। यदि इस समय खरीफ सिंचाई के लिए जल छोड़ा जाता है, तो फसल अवधि तक निरंतर जल आपूर्ति के कारण बांध का जल स्तर डेड स्टोरेज तक पहुंचने की आशंका रहेगी। ऐसी स्थिति में आगामी रबी मौसम के दौरान लगभग 58 हजार 229 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र की सिंचाई प्रभावित हो सकती है तथा पेयजल उपलब्धता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए निर्णय लिया गया कि खरीफ फसलों के लिए नहरों में पानी नहीं छोड़ा जाएगा।

पुनः विचारण के लिए बैठक 29 को:

समिति ने यह भी निर्णय लिया कि यदि आगामी दिनों में बारिश से जलाशयों में पर्याप्त जल आवक होती है और जल स्तर निर्धारित रूल कर्व से ऊपर पहुंचता है, तो खरीफ सिंचाई के लिए नहर संचालन पर पुनः विचार किया जाएगा। समिति की अगली बैठक 29 जुलाई को होगी।

जुलाई के बचे 7 दिन, जल संरचनाओं में 50 फीसदी पानी, खरीफ में नहरों से सिंचाई पर रोक
मड़ीखेड़ा डैम जिसमें अभी 50 फीसदी पानी है