जहरीली शराब मामले में एसपी सागर अनुराग सुजानिया को भोपाल भेजा, वो चले गए अपने घर

जहरीली शराब मामले में एसपी सागर अनुराग सुजानिया को भोपाल भेजा, वो चले गए अपने घर
जहरीली शराब हो या देवास के खातेगांव में टीआई दिलीप की हत्या, आबकारी पर आंच तक नहीं
शिवपुरी से सैमुअल दास::
शिवपुरी में प्रोवेशनर पीरियड गुज़ारने वाले आईपीएस अनुराग सुजानिया को सागर पुलिस अधीक्षक रहते हुए उनका ट्रांसफर भोपाल मुख्यालय किया गया। सुजानिया ने भोपाल का रास्ता तय करने की बजाए अपने घर का रुख कर लिया। सुजानिया का ट्रांसफर सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद किया गया। महत्वपूर्ण बात यह है कि मध्यप्रदेश में शराब माफिया इस कदर हावी हैं, कि उन्होंने बीते रोज देवास के खातेगांव में टीआई दिलीप पुरी को वाहन से रौंद कर उनकी हत्या कर दी गई। दोनों ही मामलों में आबकारी विभाग ओर कोई आँच नहीं आई, जबकि एक जगह एसपी का ट्रांसफर तो दूसरी जगह टीआई की निर्मम हत्या। शायद प्रदेश में शराब माफिया के इतना हावी होने से बिगड़ रहे हालातों को देखते हुई ही आईपीएस सुजानिया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
आबकारी व राजनीति का हाथ, शराब माफिया हुआ बेलगाम:
मध्यप्रदेश में शराब माफिया इस कदर हावी है कि उनके गुर्गे पुलिस थाने के टीआई को रौंदने से भी परहेज नहीं कर रहे। शराब माफिया को प्रदेश में राजनीतिक संरक्षण इस कदर हावी है कि वो खुलेआम अपनी दुकान के अलावा गांव-गांव में परचूनी की दुकानों व कमीशन पर शराब बिकवा रहे हैं। यह जानकारी आबकारी विभाग के वरिष्ठ से लेकर अधीनस्थ तक को पता है, लेकिन वो इन अवैध शराब दुकानों के खिलाफ कार्यवाही करने की बजाए, उनके संरक्षणदाता बने हुए हैं। जब भी कोई मामला होता है तो पुलिस पर कार्यवाही या पुलिस की जान लेने पर शराब तस्कर उतारू हो जाते हैं। जबकि आबकारी विभाग पर कभी कोई आंच नहीं आती, क्योंकि शराब तस्करों की वो अघोषित पार्टनर है। शायद इन्हीं सब कारणों के चलते आईपीएस अनुराग सुजानिया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। व्यक्तिगत रूप से अनुराग सुजानिया एक अच्छे इंसान हैं।
ऑन ड्यूटी मौत पर भी शहीद घोषित नहीं:
देवास के खातेगांव में सरेराह टीआई दिलीप पुरी को शराब तस्कर के आयशर वाहन में रौंद दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। ऑन ड्यूटी शराब तस्करों के हाथों जान गंवाने वाले दिलीप पुरी को शहीद का दर्जा नहीं दिया गया। सोमवार को एसपी ऑफिस पर इकठ्ठा कुछ पुलिस अधिकारी यह चर्चा कर रहे थे कि पुलिस वाला ड्यूटी अपनी जान गंवा रहा है तो उसे शहीद नहीं मानते, जबकि सेना के जवान को हार्ट अटैक से मौत पर भी शहीद का दर्जा मिलता है।




















