पेट्रोल पंप संचालक से पावरफुल शहर के ठेले वाले, हटाने जाता है पुलिस/प्रशासन का अमला

आखिर पेट्रोल पंप हटाने नपाध्यक्ष अकेले ही क्यों पहुंची? क्या प्रशासन सेट हो गया?, चिल्लाने वालों की डिमांड के चर्चे
शिवपुरी। पेट्रोल पंप संचालक से ज्यादा पावरफुल शिवपुरी शहर के ठेले वाले हैं। हम यह बात इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि ठेले वालों को हटाने के लिए प्रशासन के अधिकारियों के अलावा पुलिस का अमला पहुंचता है। जबकि सोमवार को पेट्रोल पंप हटाने के लिए नपाध्यक्ष अकेले ही पहुंच गईं, इसलिए चिल्लाकर वापस आ गईं। हालांकि देर शाम तक चिल्लाने वालों की डिमांड भी सोशल मीडिया पर ओपन होने लगी थी।
शिवपुरी शहर के झांसी तिराहे पर स्थित गांधी पेट्रोल पंप की लीज तो लगभग 42 वर्ष पूर्व खत्म हो गई थी। बावजूद इसके अभी तक यह पेट्रोल पंप संचालित होता रहा, तथा नगरपालिका के जिम्मेदार मौन थे या फिर गांधीजी मैनेज किए हुएं थे। अब जबकि हाईकोर्ट ने पेट्रोल पंप की जगह को खाली कराने के आदेश दे दिए। पंप संचालक ने फिर कुछ ऐसा मैनेजमेंट जमाया कि पंप की जमीन खाली कराने के लिए नपा सीएमओ ने पुलिस की मदद के लिए जो पत्र लिखा, उसमें वर्ष 2026 की जगह 2006 लिख दिया गया। पुलिस एवं प्रशासन का अमला आज पेट्रोल पंप पर नहीं पहुंचा, अकेली नपाध्यक्ष ही पंप के चक्कर लगाती रहीं।
आखिर ऐसी जिद क्यों पकड़ी..?
रविवार को नपाध्यक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में नपा सीएमओ पर पेट्रोल पंप संचालक से सांठगांठ के आरोप लगाए। सोमवार को नपाध्यक्ष ने पेट्रोल पंप के न केवल दो चक्कर लगाए, बल्कि वो जेसीबी लेकर पहुंच गईं, तथा टेंट लगाकर धरना देने की बात भी कही। नपाध्यक्ष की ऐसी जिद को देखकर यह चर्चाएं भी प्रबल हो गईं कि पेट्रोल पंप संचालक से 1 करोड़ रुपए की डिमांड की गई थी, जिसे पूरा न करने पर इतने चक्कर लगाए गए।
हमाम में सभी निर्बस्त्र:
हाईकोर्ट का आदेश होने के बाद भी नपा सीएमओ सहित पुलिस एवं प्रशासन ने जो सुस्ती दिखाई, उससे यह चर्चा भी चल निकली कि गांधी ने गांधीजी की मदद से उन्हें घर बिठा दिया। शायद यह बात जब नगर के प्रथम नागरिक को पता चली तो फिर उन्होंने भी गांधीजी के लिए पूरी दम लगा दी। इसका मतलब साफ है कि हमाम में सभी निर्वस्त्र हैं।




















